
मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों सबको चौंका रही है। ठाणे के अंबरनाथ और विदर्भ के अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में ऐसे बेमेल गठबंधन बने कि राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान रह गए। इन जगहों पर किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, तो धुर वैचारिक विरोधी दलों ने हाथ मिला लिया।
अंबरनाथ और अकोट में उलटफेर
- अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 सीटें थीं। यहाँ शिंदे सेना 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन 30 सीटों के बहुमत से 3 कम थी।
- BJP ने शिंदे सेना को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस और NCP से गठबंधन किया।
- नगराध्यक्ष के रूप में BJP की तेजश्री करंजुले चुनी गई।
- बाद में कांग्रेस के कई नगरसेवक BJP में शामिल हो गए, वहीं शिंदे सेना ने NCP के चार सदस्य अपने साथ जोड़े। दो निर्दलीय भी शिंदे सेना में चले गए और बहुमत 33 सीटों तक पहुंच गया।
- अकोट नगर परिषद में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही। यहाँ BJP की माया धुले नगराध्यक्ष बनीं।
29 महानगर पालिकाओं में बेमेल गठबंधन
- आगामी महानगर पालिका चुनाव 15 जनवरी को होने हैं।
- कई जगह गठबंधन वैचारिक नहीं बल्कि सुविधा आधारित हैं।
- मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, पिंपरी-चिंचवड, नागपुर और नासिक में अलग-अलग गठबंधन नजर आ रहे हैं।
- ठाणे: शिंदे सेना + BJP,
- पनवेल: BJP + शिंदे सेना + NCP + RPI,
- नवी मुंबई: शिंदे सेना और BJP अलग-अलग लड़ रहे हैं।
निर्विरोध और पुराना ट्रेंड
- इस बार 66 नगरसेवक निर्विरोध चुने गए। इनमें 43 BJP, 19 शिंदे सेना और 2 NCP के हैं।
- भारत में बेमेल गठबंधन कोई नई बात नहीं। 1967 में कांग्रेस के विरोध में पहली बार ऐसे गठबंधन बने थे।
- लेकिन अब स्थिति अलग है। राजनीतिक विचारधारा की निष्ठा हाशिए पर है और जीतकर सत्ता हथियाने की मानसिकता हावी है।
विश्लेषण:
महाराष्ट्र में राजनीतिक दल अब वैचारिक विरोधियों के साथ भी गठबंधन करने से नहीं हिचकिचाते, जिससे चुनावी नतीजे और सत्ता की चालें अप्रत्याशित हो रही हैं। यह सुविधा–आधारित राजनीति का नया दौर है, जहाँ दोस्ती और दुश्मनी दोनों का मायाजाल चुनावी रणनीति का हिस्सा बन गया है।