Saturday, January 10

कोडीन कफ-सिरप में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह ने ईडी को बताए कई राज, अमित टाटा से भी हुई पूछताछ

 

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में महत्वपूर्ण मोड़ आया है। शुक्रवार को ईडी की टीम ने लखनऊ जिला जेल में बंद बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और उसके सहयोगी अमित टाटा से पूछताछ की। इस दौरान आलोक सिंह ने कई महत्वपूर्ण राज खोले हैं। हालांकि, अमित टाटा से पूछताछ शनिवार को की जानी थी।

 

आलोक सिंह की पूछताछ

 

पूछताछ के दौरान आलोक सिंह ने बताया कि उसकी केवल दो फर्म हैं और उन फर्मों से कोई गलत काम नहीं हुआ है। करीब तीन घंटे तक चली पूछताछ में आलोक सिंह ने यह भी कहा कि वह अपनी संपत्ति के बारे में कागज देखने के बाद ही जानकारी दे सकता है। ईडी के सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में मिली जानकारी की अब गहनता से जांच की जाएगी और यदि जरूरत पड़ी तो आलोक सिंह से फिर से पूछताछ की जा सकती है।

 

ईडी ने आलोक सिंह से उसकी फर्म के टर्नओवर, मकान और फर्मों से जुड़े कई सवाल किए थे। खासतौर पर यह पूछा गया था कि उसकी फर्म से कितनी कंपनियों की दवाइयां बेची जाती थीं, और उन दवाइयों का किस तरह से वितरण किया जाता था। हालांकि, आलोक सिंह ने कई सवालों का गोलमोल जवाब दिया और कुछ सवालों पर चुप्पी साध ली।

 

अमित टाटा का गोल-मोल जवाब

 

ईडी की टीम ने आलोक सिंह से पूछताछ के दौरान अमित टाटा को भी बुलाया। हालांकि, अमित टाटा ने भी ईडी के सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोल-मोल जवाब दिया। अमित टाटा ने स्वीकार किया कि फर्म उसकी थी, लेकिन उस पर कारोबार शुभम जायसवाल ही करता था। उसने बताया कि शुभम के कहने पर ही उसने फर्म का लाइसेंस लिया और वही लाइसेंस मंजूर हुआ था। अमित ने यह भी कहा कि शुभम के निर्देश पर ही वह फर्म में पैसा लगाता था।

 

आगे की कार्रवाई

 

ईडी ने दोनों आरोपियों से प्राप्त जानकारी की जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार में शामिल लोगों से जुड़ी जानकारी और उनका नेटवर्क अब जांच के दायरे में आ गया है।

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