Saturday, January 10

अपर्णा यादव बोलीं— विशाखा कमेटी की जांच गलत डॉ. रमीज का आरोप— उपाध्यक्ष ने कमरे में बुलाकर आरोप स्वीकार करने का दबाव बनाया

 

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लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में एक महिला विभागाध्यक्ष द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप और उससे जुड़ी विशाखा कमेटी की जांच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को बिना पूर्व सूचना के केजीएमयू पहुंचीं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने विशाखा कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए जांच को गलत करार दिया। वहीं, जांच में निर्दोष पाए गए अधीनस्थ डॉक्टर डॉ. रमीज मलिक ने अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

अपर्णा यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महिला विभागाध्यक्ष द्वारा अपने अधीनस्थ डॉक्टर पर लगाए गए छेड़छाड़ के आरोपों की जिस विशाखा कमेटी ने जांच की, उसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन पर पहले से ही छेड़छाड़ के आरोप लग चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केजीएमयू प्रशासन ने मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्रवाई से बचता रहा।

 

उन्होंने यह भी कहा कि कथित ‘लव जिहाद’ से जुड़े मामले में भी विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही है और पीड़िता को न्याय नहीं मिल पाया।

 

डॉ. रमीज ने लगाए प्रताड़ना के आरोप

 

वहीं, विशाखा कमेटी की जांच में क्लीन चिट पाए डॉ. रमीज मलिक ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव पर दबाव बनाने और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। डॉ. रमीज का कहना है कि 9 जनवरी को महिला आयोग में सुनवाई के दौरान अपर्णा यादव ने उन्हें अपने कमरे में बुलाया और छेड़छाड़ के आरोप स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया।

 

डॉ. रमीज के अनुसार, उनसे आरोपों के संबंध में पूछताछ करने के बजाय बिना लाइसेंस के ब्लड बैंक संचालन से जुड़े सवाल किए गए, जबकि इसकी जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष और केजीएमयू प्रशासन की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोप स्वीकार न करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें कमरे से बाहर निकाल दिया गया।

 

विवाद की पृष्ठभूमि

 

जिस महिला प्रोफेसर की शिकायत के आधार पर यह मामला सामने आया, वह अपने विभाग की अध्यक्ष हैं। उन पर विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के भी गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि मेडिकल जांचों के नाम पर मरीजों से निर्धारित दर से कहीं अधिक शुल्क वसूला गया।

 

डॉ. रमीज का कहना है कि उन्होंने विभाग में हो रही कथित अनियमितताओं में शामिल होने से इनकार किया था, जिसके बाद उन्हें झूठे छेड़छाड़ के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। उन्होंने जनवरी 2025 में ही कुलपति को लिखित शिकायत देकर इस आशंका से अवगत कराया था।

 

प्रमुख घटनाक्रम

 

अप्रैल 2024: उपकरण सूची में महिला प्रोफेसर के कथित फर्जी हस्ताक्षर सामने आए।

17 जनवरी 2025: अधीनस्थ डॉक्टर ने कुलपति को लिखित शिकायत देकर छेड़छाड़ के आरोप में फंसाने की धमकी का जिक्र किया।

17 अक्टूबर 2025: फाइनेंस ऑफिस की बैठक में महिला प्रोफेसर ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।

26 नवंबर 2025: विशाखा कमेटी का गठन हुआ।

जांच में अधीनस्थ डॉक्टर को निर्दोष पाया गया और रिपोर्ट महिला आयोग को भेजी गई। मामला फिलहाल महिला आयोग में लंबित है।

 

वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

 

महिला प्रोफेसर पर आरोप है कि—

 

5 रुपये में होने वाली एबीडी पैड जांच के 85 रुपये वसूले गए।

63 रुपये की एक्सटेंडेड फेनोटाइप ब्लड ग्रुपिंग 165 रुपये में की गई।

डिस्टिल्ड वॉटर की खरीद दिखाकर एक वर्ष में 9.60 लाख रुपये खर्च किए गए।

केमिल्यूमिनेसेस टेस्ट में निर्धारित दर से कहीं अधिक भुगतान किया गया।

 

इस मामले में ब्लड बैग और अन्य सामग्री सप्लाई करने वाली फर्म पर भी संदिग्ध बिलिंग के आरोप हैं। सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री कार्यालय से इस पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं।

 

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