
कनाडा में विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह उन्हें स्थायी रूप से बसने (Permanent Residency – PR) का मौका भी देती है। हर साल लाखों भारतीय छात्र बैचलर्स या मास्टर्स की पढ़ाई के लिए कनाडा जाते हैं, लेकिन बहुत कम ही जानते हैं कि कौन सा कोर्स करने के बाद PR मिलना सबसे आसान होता है।
सीईसी (Canadian Experience Class) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोई छात्र कनाडा में मास्टर्स डिग्री हासिल करता है, तो उसके PR मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण है कि मास्टर्स डिग्री वाले छात्रों को तीन साल का पोस्ट–ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) मिलता है। इससे छात्र कनाडा में नौकरी कर सकते हैं और वहां का वर्क एक्सपीरियंस हासिल कर सकते हैं। यह अनुभव उन्हें एक्सप्रेस एंट्री प्रोग्राम के तहत PR के लिए योग्य बनाता है।
कनाडा में PR के लिए कॉम्प्रिहेंसिव रैंकिंग सिस्टम (CRS) का उपयोग किया जाता है। इस सिस्टम में मास्टर्स डिग्री वाले छात्रों को 135 प्वाइंट्स मिलते हैं। इसके अलावा, कनाडा से मास्टर्स डिग्री लेने पर अतिरिक्त 30 प्वाइंट्स भी मिलते हैं। CRS में ज्यादा प्वाइंट्स वाले उम्मीदवारों को एक्सप्रेस एंट्री के जरिए PR के लिए Invitation to Apply (ITA) मिलता है।
उदाहरण: रोहित का अनुभव
24 साल के रोहित के पास बैचलर्स डिग्री और भारत में 2 साल का वर्क एक्सपीरियंस था। अंग्रेजी बोलने में दक्ष होने के बावजूद उसका CRS स्कोर 416 था, जबकि पिछले CEC ड्रॉ में कट-ऑफ स्कोर 515–547 के बीच था।
रोहित ने कनाडा में टोरंटो यूनिवर्सिटी से एक वर्षीय मास्टर्स कोर्स किया। डिग्री पूरा होने पर उसे 3 साल का PGWP मिला और उसने 1 साल कनाडा में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में काम किया। इस अनुभव से उसके CRS स्कोर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई – 416 से बढ़कर 539 प्वाइंट्स।
- उम्र: 24 साल के होने पर 110 प्वाइंट्स
- एजुकेशन: बैचलर्स से मास्टर्स होने पर 120 → 135 प्वाइंट्स
- कनाडाई वर्क एक्सपीरियंस: 0 → 40 प्वाइंट्स
- स्किल ट्रांसफर: 25 → 50 प्वाइंट्स
- विदेशी वर्क एक्सपीरियंस: 25 → 38 प्वाइंट्स
- अतिरिक्त प्वाइंट्स: 0 → 30
इस तरह, रोहित आसानी से CEC स्ट्रीम के तहत PR पाने के योग्य हो गया।
निष्कर्ष
कनाडा में स्थायी रूप से बसने का सबसे आसान रास्ता है – पहले अपने देश में वर्क एक्सपीरियंस हासिल करना, फिर कनाडा में मास्टर्स डिग्री लेना और वहां का वर्क एक्सपीरियंस जोड़ना। इससे न केवल CRS स्कोर बढ़ता है, बल्कि PR मिलने की संभावना भी सुनिश्चित हो जाती है।