Saturday, January 10

ट्रंप को मोदी का फोन नहीं, भारत-अमेरिका ट्रेड डील रुकी, अमेरिका बौखलाया

 

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अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से तैयार ट्रेड डील अब तक साइन नहीं हो सकी। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया है कि डील इसलिए रुकी क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। लुटनिक के अनुसार, डील पूरी तरह तैयार थी और केवल मोदी के कॉल की प्रतीक्षा थी, जो नहीं हुई।

 

अमेरिका का दबाव और विरोधाभासी बयान

 

हालांकि, 6 जनवरी को ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी उनसे मिलने के लिए संपर्क करना चाहते थे और उन्होंने हां कर दी थी। लुटनिक के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि अमेरिका चाहता था कि मोदी उनसे सीधे बात करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान भारत पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इसे अमेरिकी योजना के रूप में पेश करना सही नहीं है।

 

अमेरिका की असली मांग

 

अमेरिका बार-बार डील से पीछे हट रहा है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि भारत का कृषि क्षेत्र विदेशी निवेश के लिए खुले, जिसमें अमेरिकी कृषि उत्पाद, दाल, मक्का, डेयरी और जीएम फसलों के लिए भारतीय बाजार शामिल हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने किसानों की सुरक्षा के लिए यह कदम नहीं उठाएगा। इस वजह से अमेरिका बौखलाया हुआ है।

 

विशेषज्ञों की राय

 

पूर्व राजनयिक केसी सिंह ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की अजीब और अप्रत्याशित मांगे और उनका सार्वजनिक हो जाना भारत को सतर्क रखता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार सौरव झा ने कहा कि यह चाल भारत को अमेरिका की तरफ धकेलने और रूस-चीन के समीकरण को बदलने की पुरानी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

 

झा ने तीन संभावनाओं का विश्लेषण किया है:

 

  1. भारत-अमेरिका ट्रेड डील तैयार है लेकिन यूरोप के वीटो और रूस के युद्ध के कारण साइन नहीं हुई।
  2. अमेरिका भारत को अपनी जागीर बनाने की आखिरी कोशिश कर रहा है।
  3. अमेरिका-चीन G2 व्यवस्था के तहत वैश्विक शतरंज खेल रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों को हटाने की कोशिश हो रही है, जो सबसे अधिक संभावित है।

 

निष्कर्ष

 

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसान और घरेलू बाजार की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। अमेरिका की नाराजगी और दबाव से ट्रेड डील रोकना भारत की रणनीति और आत्मनिर्भर नीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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