
कड़ाके की ठंड के मौसम में रूम हीटर और बढ़ते बिजली बिल आम लोगों के लिए बड़ी चिंता बन जाते हैं। खासतौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए हीटर चलाना न केवल महंगा साबित होता है, बल्कि इससे कमरे की नमी भी खत्म हो जाती है, जिससे त्वचा में रूखापन बढ़ता है। ऐसे में इन दिनों एक देसी जुगाड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें सिर्फ चार ईंट, मिट्टी का गमला और मोमबत्तियों की मदद से कमरे को गर्म रखने का दावा किया जा रहा है।
यूट्यूब पर वायरल इस घरेलू उपाय को ‘जीरो कॉस्ट हीटर’ कहा जा रहा है। यह तरीका खासतौर पर उन इलाकों के लिए उपयोगी बताया जा रहा है, जहां सर्दियों में बिजली की कटौती अधिक होती है। इस देसी तकनीक में घर में आसानी से उपलब्ध सामान का इस्तेमाल कर बिना बिजली के गर्माहट पैदा की जाती है।
कमरे की इन्सुलेशन है सबसे जरूरी
इस देसी हीटर को इस्तेमाल करने से पहले कमरे की इन्सुलेशन पर ध्यान देना जरूरी है। खिड़कियों से ठंडी हवा और नमी अंदर न आए, इसके लिए शीशों पर थर्माकोल शीट लगाई जा सकती है। दरवाजों और खिड़कियों के कोनों में मौजूद छोटे छेदों को कपड़े या टेप से बंद करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा फर्श से आने वाली ठंड को रोकने के लिए कालीन या दरी बिछाना जरूरी है।
कैसे बनता है देसी हीटर
देसी हीटर बनाने के लिए चार ईंटों को एक सुरक्षित जगह पर छोटे चूल्हे की तरह व्यवस्थित किया जाता है। दो ईंटें आमने-सामने खड़ी की जाती हैं, एक ईंट पीछे की ओर लगाई जाती है और चौथी ईंट को बीच में आधार के रूप में रखा जाता है। इसी ईंट पर मोमबत्तियां रखी जाती हैं।
मोमबत्ती से पैदा होती है गर्मी
बीच वाली ईंट पर तीन से चार छोटी मोमबत्तियां या टी-लाइट कैंडल्स जलाई जाती हैं। मोमबत्ती की लौ से निकलने वाली गर्मी ऊपर की ओर उठती है। इसके ऊपर मिट्टी का गमला उल्टा रख दिया जाता है, जो ईंटों पर टिका होता है ताकि हवा का प्रवाह बना रहे।
मिट्टी का गमला बनता है रेडिएटर
मिट्टी का गमला गर्मी को लंबे समय तक सोखकर रखने की क्षमता रखता है। गमले के ऊपरी हिस्से को फॉइल पेपर से ढक दिया जाता है, जिससे गर्मी बाहर फैलने के बजाय अंदर रिफ्लेक्ट होती है। कुछ ही देर में गमला गर्म होकर रेडिएटर की तरह काम करने लगता है और कमरे में धीरे-धीरे गरमाहट फैलाता है।
सावधानी है बेहद जरूरी
हालांकि यह तरीका किफायती बताया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस सेटअप को पर्दों, कपड़ों या किसी भी ज्वलनशील वस्तु से दूर रखें। कमरे में हल्का वेंटिलेशन जरूरी है ताकि ऑक्सीजन की कमी न हो। सोने से पहले मोमबत्तियों की स्थिति अवश्य जांच लें।
डिस्क्लेमर
यह जानकारी यूट्यूब और इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो व दावों पर आधारित है। अख़बार इसकी पूर्ण सत्यता और प्रभावशीलता की जिम्मेदारी नहीं लेता है।