
इंदौर, मध्यप्रदेश: इंदौर में सीवेज पानी के भूजल में घुलने से हुई 18 मौतों के बाद अब मध्यप्रदेश के 39 जिलों के भूजल में नाइट्रेट का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। केंद्रीय सरकार द्वारा कराए गए एक अध्ययन के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से 39 जिलों में नाइट्रेट (NO3) की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक पाई गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, नाइट्रेट की अधिकता से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घट सकता है, जो खासकर छोटे बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी की गई यह रिपोर्ट अगस्त 2025 में पब्लिश हुई थी, जो 2024 की भूजल गुणवत्ता पर आधारित है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यप्रदेश राज्य में नाइट्रेट की अधिकतम मात्रा उत्तर प्रदेश के बाद दूसरी सबसे अधिक है।
पानी में नाइट्रेट का खतरा:
नाइट्रेट के बढ़े हुए स्तर से पानी पीने वालों के शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। इसके कारण छोटे बच्चों को विशेष रूप से खतरा हो सकता है, क्योंकि उनका शरीर नाइट्रेट की अधिक मात्रा को ठीक से संभाल नहीं पाता।
इन 39 जिलों में पाए गए उच्च नाइट्रेट स्तर:
मध्यप्रदेश के जिन 39 जिलों में नाइट्रेट की अधिकता पाई गई है, उनमें इंदौर, आगर मालवा, अनूपपुर, बालाघाट, बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, जबलपुर, झाबुआ, कटनी, खंडवा, खरगोन, मंडला, मंदसौर, मुरैना, नरसिंहपुर, नीमच, पन्ना, राजगढ़, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, शहडोल, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी, टीकमगढ़, उज्जैन और उमरिया शामिल हैं।
नाइट्रेट के बढ़ने के कारण:
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने के कई कारण हैं। खराब सीवेज निपटान व्यवस्था, सेप्टिक टैंक से रिसाव, शहरी विकास, जलवायु परिवर्तन, और खेती में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग इसके प्रमुख कारण हैं। विशेष रूप से धान और गेहूं जैसी फसलों के लिए अधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग भूजल में नाइट्रेट की बढ़ोतरी का कारण बन रहा है।
राज्य और केंद्र की भूमिका:
पानी राज्य का विषय होने के कारण भूजल संसाधनों का टिकाऊ विकास और प्रबंधन राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। हालांकि, केंद्र सरकार अपनी योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से राज्य सरकारों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
मध्यप्रदेश के पानी में नाइट्रेट के स्तर में वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है, और इसे लेकर तात्कालिक कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि इस स्थिति से निपटा जा सके और भविष्य में संभावित त्रासदियों से बचा जा सके।