Thursday, January 8

मनरेगा आंदोलन से कांग्रेस को दिख रही उम्मीद, इतिहास भी पार्टी के पक्ष में

 

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नई दिल्ली: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम और स्वरूप को बदलकर VB-G RAM G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) के तहत आगे बढ़ाने के प्रयास ने सियासी बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस ने इसे मनरेगा की आत्मा पर हमला बताया है और देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों, खासकर अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए जीवन रेखा रही है।

 

कानूनी गारंटी पर खतरा

कांग्रेस का आरोप है कि नए ढांचे में रोजगार की कानूनी गारंटी, मजदूरी भुगतान की समयबद्धता और जरूरतों के अनुरूप काम देने की प्रतिबद्धता कमजोर हो सकती है। इसे रोकने के लिए पार्टी पंचायत से संसद तक डेढ़ महीने का व्यापक कार्यक्रम चला रही है। इस अभियान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र सीधे ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा मजदूरों तक पहुँचाए जाएंगे।

 

राजनीतिक रणनीति

हाल के वर्षों में कांग्रेस ने वोट चोरी और SIR जैसे मुद्दों पर देशव्यापी अभियान चलाने की कोशिश की, लेकिन सीमित असर देखने को मिला। इस बार पार्टी ने रोज़ी-रोटी से जुड़े मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया है। मनरेगा को लेकर कांग्रेस का मानना है कि यह ग्रामीण भारत में फिर से राजनीतिक जमीन तैयार करने का अवसर है।

 

इतिहास भी पार्टी के पक्ष में

कांग्रेस के लिए मनरेगा का राजनीतिक महत्व नया नहीं है। माना जाता है कि 2009 में केंद्र की सत्ता में उसकी वापसी में मनरेगा की निर्णायक भूमिका रही थी। अब पार्टी उसी सामाजिक आधार को सक्रिय करना चाहती है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां कांग्रेस लंबे समय से कमजोर रही है।

 

अवसर और परीक्षा दोनों

केंद्र सरकार योजनाओं को विकसित भारत के नैरेटिव के तहत नए नाम और ढांचे में पेश कर रही है, जिसे कुछ वर्ग सकारात्मक रूप में देखता है। ऐसे में कांग्रेस को साबित करना होगा कि VB-G RAM G वास्तव में मनरेगा को कमजोर करता है। इस अभियान की सफलता इसके कार्यान्वयन और मजदूरों के अनुभवों, समस्याओं और आशंकाओं को आंदोलन के केंद्र में रखने पर निर्भर करेगी।

 

कुल मिलाकर, मनरेगा बनाम VB-G RAM G कांग्रेस के लिए एक अवसर और परीक्षा दोनों है। अगर पार्टी सचमुच मजदूरों के बीच जाकर उनके हितों की लड़ाई लड़े, तो यह आंदोलन उसे ग्रामीण भारत में फिर से प्रासंगिक बना सकता है।

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