
वॉशिंगटन।
वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ग्रीनलैंड को लेकर अपनी बयानबाजी तेज कर दी है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि ट्रंप प्रशासन आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड को हासिल करने के विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से चर्चा कर रहा है। इन विकल्पों में अमेरिकी सेना के इस्तेमाल की संभावना भी शामिल बताई गई है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए बयान में व्हाइट हाउस ने कहा कि आर्कटिक में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ग्रीनलैंड को हासिल करना राष्ट्रपति ट्रंप के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता है। प्रशासन का मानना है कि इस क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी भविष्य की भू-राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर बेहद अहम है।
ग्रीनलैंड ने प्रस्ताव ठुकराया
करीब 57 हजार की आबादी वाला ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह अमेरिका का हिस्सा बनने को तैयार नहीं है। ग्रीनलैंड प्रशासन ने दोहराया है कि यह द्वीप बिकाऊ नहीं है। इसके बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप अपने रुख पर कायम हैं और इसे लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे।
अमेरिका के पास क्या हैं विकल्प
व्हाइट हाउस के अनुसार, ओवल ऑफिस में चल रही बैठकों में कई विकल्पों पर विचार हो रहा है। इनमें ग्रीनलैंड को सीधे खरीदने का प्रस्ताव या फिर कम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन (COFA) जैसे समझौते पर चर्चा शामिल है। ऐसे किसी समझौते के तहत ग्रीनलैंड औपचारिक रूप से अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन रक्षा और विदेश नीति के मामलों में वॉशिंगटन का प्रभाव बढ़ सकता है।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति के पास सैन्य विकल्प हमेशा मौजूद रहता है। हालांकि संभावित खरीद की कीमत या किसी समझौते की शर्तों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया
ट्रंप के ताजा दावों के बाद ग्रीनलैंड प्रशासन ने डेनमार्क के साथ मिलकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बैठक की मांग की है। ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बैठक का उद्देश्य ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के हालिया बयानों पर स्पष्ट बातचीत करना है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाटो देशों के समर्थन और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड में रुचि कम नहीं हुई है। संकेत हैं कि अपने कार्यकाल के शेष तीन वर्षों में ट्रंप इस मुद्दे को लगातार आगे बढ़ाते रहेंगे।