Thursday, January 8

लोन बांटने में बढ़त, डिपॉजिट्स पीछे – ग्राहकों तक RBI की कटौती का फायदा नहीं पहुंचने का खतरा

नई दिल्ली: देश के बैंकों में लोनटूडिपॉजिट रेशियो (LDR) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। दिसंबर तिमाही में यह 81% पर पहुंच गया, जिसका अर्थ है कि बैंक जितनी रकम जमा के रूप में ले रहे हैं, उसका 81% हिस्सा वे लोन के रूप में बांट रहे हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि जब लोन की मांग जमाओं की तुलना में तेजी से बढ़ती है, तो बैंकों को फंड जुटाने में अधिक खर्च करना पड़ता है। इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है – लोन महंगे हो सकते हैं या RBI द्वारा ब्याज दरों में की गई कटौती का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुँच पाएगा।

प्राइवेट बैंकों की स्थिति
HDFC बैंक का लोन 12% बढ़ा जबकि डिपॉजिट्स सिर्फ 11.5% बढ़ीं। इसके कारण LDR लगभग 100% के करीब पहुंच गया। इसी तरह, Axis बैंक और Kotak Mahindra Bank ने भी लोन में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की, जबकि डिपॉजिट्स अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार से बढ़ीं।

सरकारी बैंकों की स्थिति
बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में भी क्रेडिट ग्रोथ डिपॉजिट्स की तुलना में अधिक रही। उदाहरण के तौर पर, बैंक ऑफ बड़ौदा में लोन 14.57% बढ़ा, जबकि डिपॉजिट्स सिर्फ 10.25% बढ़ीं।

एनबीएफसी का प्रदर्शन
नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां भी तेज़ी से बढ़ रही हैं। Bajaj Finance की AUM 22% बढ़कर ₹4.85 लाख करोड़, Poonawalla Fincorp की AUM 77.5% बढ़ी और M&M Finance ने भी लोन और एसेट्स में बढ़ोतरी दर्ज की।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो बैंकों को या तो डिपॉजिट्स पर ब्याज दरें बढ़ानी पड़ेंगी या फिर RBI की ब्याज कटौती का लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाएगा।

 

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