Sunday, February 1

 मॉडर्न कैपिटलिज़म: सत्ता का संरक्षक और समाज की कीमत

 

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स्वेन बेकर्ट की किताब ‘Capitalism: A Global History’ आधुनिक पूंजीवाद की यात्रा का गहन विश्लेषण पेश करती है। बेकर्ट का कहना है कि कैपिटलिज़म केवल आर्थिक प्रणाली नहीं, बल्कि एक सत्ता केंद्रित पॉलिटिकल प्रोजेक्ट रहा है। चाहे सत्ता लोकतांत्रिक हो या निरंकुश, उसने हमेशा इस प्रणाली को बढ़ावा दिया।

 

किताब में बताया गया है कि कैपिटलिज़म की शुरुआत व्यापारियों के नेटवर्क से हुई और इसे सत्ता के संरक्षण, बंधुआ मजदूरी और उपनिवेशीकरण के जरिए वैश्विक स्तर पर फैलाया गया। औद्योगिक क्रांति ने इसे नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया, लेकिन इसके लिए समाज ने भारी कीमत चुकाई। स्थानीय लोगों की जमीन छीनी गई, उपनिवेशों का दमन हुआ और श्रमिकों को दबाया गया।

 

बेकर्ट स्पष्ट करते हैं कि कैपिटलिज़म के नाम पर पेश की जाने वाली ‘नैचुरल मार्केट’ की तस्वीर अक्सर झूठी होती है। यह सिर्फ नवाचार और समृद्धि का साधन नहीं, बल्कि हिंसा, शोषण और आर्थिक असमानता का जरिया भी रहा है।

 

किताब में प्राचीन व्यापारिक शहरों से लेकर 21वीं सदी के ग्लोबल ब्रांड्स और सप्लाई चेन की समस्याओं तक का विस्तार मिलता है। कैरेबियाई द्वीपों की गन्ना फ़ैक्ट्रियों से लेकर अमेरिका के डेट्रॉयट की ऑटो इंडस्ट्री तक, बेकर्ट ने दिखाया कि कैपिटलिज़म का स्वर्णयुग हमेशा सत्ता के संरक्षण पर आधारित रहा।

 

हालांकि आलोचक कहते हैं कि स्वेन ने कैपिटलिज़म के ग्रोथ, इनोवेशन और जीवन स्तर सुधार जैसे पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। फिर भी यह किताब, आधुनिक पूंजीवाद की लंबी और जटिल यात्रा को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।

 

 

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