Wednesday, January 7

गोल्डन वीजा भारतीयों के लिए महंगा, रुपये के कमजोर होने से बढ़ा ₹51 लाख का बोझ

 

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नई दिल्ली: विदेश जाकर बसने या निवेश करने के इच्छुक भारतीयों के लिए गोल्डन वीजा अब और महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी का कारण वीजा की फीस में इजाफा नहीं, बल्कि भारतीय रुपये का विदेशी मुद्रा के मुकाबले लगातार कमजोर होना है।

 

 

 

साइप्रस वीजा में 51 लाख का उछाल

 

साल 2025 की शुरुआत में साइप्रस का गोल्डन वीजा भारतीय निवेशकों के लिए लगभग 2.66 करोड़ रुपये में उपलब्ध था। लेकिन दिसंबर तक इसका खर्च बढ़कर 3.17 करोड़ रुपये हो गया। यानी सिर्फ रुपये की कमजोरी के कारण निवेशकों को 51 लाख रुपये ज्यादा चुकाने पड़े।

 

 

 

यूरोप और अन्य देशों में भी यही हाल

 

साइप्रस ही नहीं, कई अन्य देशों में भी गोल्डन वीजा की लागत बढ़ी है:

 

ग्रीस: 250,000 यूरो, लगभग 42 लाख रुपये महंगा।

माल्टा: एडमिनिस्ट्रेटिव और प्रोफेशनल फीस मिलाकर 59 लाख रुपये महंगा।

न्यूजीलैंड: बिजनेस इन्वेस्टर वर्क वीजा 42 लाख रुपये महंगा।

अमेरिका: EB-5 वीजा 33 लाख रुपये महंगा।

सिंगापुर: ग्लोबल इन्वेस्टर प्रोग्राम 7.2 करोड़ रुपये महंगा।

 

ये बढ़ोतरी रुपये के कमजोर होने और विदेशी मुद्रा में होने वाले अतिरिक्त खर्चों के कारण हुई है।

 

 

 

अतिरिक्त खर्चों ने बढ़ाई लागत

 

ग्रीस में वीजा शुल्क के अलावा 50,000 यूरो अतिरिक्त खर्च।

साइप्रस में प्रॉपर्टी पर 15% VAT।

माल्टा में 60,000 यूरो तक एडमिनिस्ट्रेटिव और प्रोफेशनल फीस।

 

इस साल रुपये का डॉलर के मुकाबले गिरकर 85 से 91 तक पहुँच जाना और यूरो के मुकाबले 20% तक कमजोर होना, भारतीय परिवारों की कुल लागत को काफी बढ़ा गया।

 

 

 

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

 

सिस्टमैटिक्स प्राइवेट वेल्थ के सीईओ भास्कर हाजरा के अनुसार, “भारतीय आवेदक करेंसी के जोखिम के प्रति संवेदनशील हैं। विदेशी मुद्रा में मामूली उतार-चढ़ाव भी रुपये में भारी वृद्धि कर सकते हैं।”

 

एंट्रस्ट फैमिली ऑफिस की सीईओ स्रीप्रिया एन.एस. कहती हैं, “भारतीय निवेशक रुपये में योजना बनाते हैं, लेकिन भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है। नियम उन्हें हेजिंग से रोकते हैं। इसलिए 3-5% उतार-चढ़ाव भी 15-30 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ जोड़ सकता है।”

 

साल 2025 में, डॉलर के मुकाबले रुपये 6.5% और यूरो के मुकाबले 20% गिर गए। इसका मतलब है कि €500,000 वाले प्रोग्राम के लिए भारतीय परिवारों को लगभग 90 लाख रुपये ज्यादा चुकाने पड़े।

 

 

 

संक्षेप में: गोल्डन वीजा की फीस जस की तस है, लेकिन रुपये की कमजोरी और विदेशी मुद्रा में होने वाले अतिरिक्त खर्च भारतीय निवेशकों और परिवारों के लिए इसे महंगा बना रहे हैं।

 

 

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