
नई दिल्ली: देश में एलपीजी सब्सिडी छोड़ने वाले उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 तक 5.6 करोड़ से अधिक लोगों ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी। इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण बड़े और अमीर राज्यों में आर्थिक क्षमता का बढ़ना बताया जा रहा है।
राज्यों की सूची में महाराष्ट्र सबसे आगे
सब्सिडी छोड़ने वालों में महाराष्ट्र सबसे ऊपर है, जहाँ 2021 से 2025 के बीच 94.6 लाख उपभोक्ताओं ने सब्सिडी से किनारा किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 69.2 लाख और दिल्ली में 44.8 लाख लोग एलपीजी सब्सिडी छोड़ चुके हैं। इसके बाद कर्नाटक (38 लाख), राजस्थान (36.7 लाख), तमिलनाडु (34.1 लाख), गुजरात (26.2 लाख), मध्य प्रदेश (23.2 लाख), पंजाब (22.3 लाख) और बिहार (21.6 लाख) का नाम आता है।
सब्सिडी का भविष्य और कीमतें
दिल्ली में घरेलू 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत फिलहाल 853 रुपये है। उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को 9 सिलेंडर तक प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है। वहीं, सरकारी तेल कंपनियों ने हाल ही में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है।
सरकार अब एलपीजी की सब्सिडी का कैलकुलेशन बदलने पर विचार कर रही है। अमेरिका से एलपीजी सप्लाई के नए कॉन्ट्रैक्ट के कारण सब्सिडी की गणना में अमेरिका के बेंचमार्क प्राइस और महंगी शिपिंग लागत को शामिल करने की संभावना है।
विशेष ध्यान: बड़ी संख्या में लोग सब्सिडी छोड़ रहे हैं, खासकर उन राज्यों में जहाँ आर्थिक क्षमता अधिक है। यह संकेत है कि उपभोक्ता अब बाजार मूल्य पर गैस लेने में सक्षम हो रहे हैं।