Friday, January 2

पिथौरागढ़ में पलायन की मार: 100 वर्षीय बुजुर्ग के अंतिम संस्कार में नहीं मिले लोग, SSB जवानों ने कंधा दिया

 

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पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में पलायन का दर्द एक मार्मिक घटना के जरिए सामने आया। जिले के ताड़ेगांव गांव में बुधवार को 100 वर्षीय झुपा देवी का निधन हुआ। परिवार में केवल तीन सक्षम पुरुष ही मौजूद थे, जिनके साथ बुजुर्ग के पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक ले जाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में ग्राम प्रधान ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) जवानों की मदद ली।

 

ग्रामीण और प्रशासन की कोशिशें

श्मशान घाट लगभग 2 किलोमीटर दूर भारत-नेपाल सीमा के पास काली नदी के किनारे स्थित है। अंतिम यात्रा के लिए केवल तीन पुरुष – बेटे रमेश चंद, पोते रवि चंद और एक अन्य ग्रामीण मौजूद थे। पारंपरिक रीति के अनुसार शव को श्मशान घाट तक पुरुष ही ले जाते हैं। गांव में अन्य सक्षम पुरुष न होने के कारण ग्राम प्रधान दीपक बिष्ट ने SOS जारी किया और SSB जवान मौके पर पहुंचे।

 

SSB जवानों ने निभाया फर्ज

BOP में तैनात जवानों ने न केवल पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुँचाया, बल्कि अंतिम संस्कार में भी पूरी मदद की। SSB अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि दो जूनियर अधिकारियों और चार जवानों को तुरंत भेजा गया और अंतिम संस्कार को पूरी विधि के साथ संपन्न कराया गया।

 

पलायन की गहरी छाया

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार ताड़ेगांव में 3 वर्ग किलोमीटर में केवल लगभग 150 लोग रहते हैं। लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर रोजगार के लिए अधिकांश लोग शहरों और कस्बों की ओर जा चुके हैं। इस वजह से गांव में केवल कुछ बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे ही रह गए हैं। ग्राम प्रधान दीपक बिष्ट ने कहा कि यही कारण है कि गांव में मृतक को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए पर्याप्त पुरुष नहीं हैं।

 

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2011 और 2018 के बीच लगभग 3.8 लाख निवासी अस्थायी रूप से अपने गांव छोड़ चुके हैं। 2018 और 2022 के बीच 3.07 लाख लोगों ने ऐसा किया। इससे 24 गांव पूरी तरह निर्जन हो गए हैं।

 

निष्कर्ष

ताड़ेगांव की यह घटना न केवल पलायन की गंभीरता को उजागर करती है, बल्कि सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में जीवित रहने वाले बुजुर्गों और ग्रामीणों की कठिन परिस्थितियों को भी सामने लाती है।

 

 

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