Friday, January 2

तेजस्वी यादव की पटना वापसी से पहले राजद में मंथन तेज, 3 जनवरी की बैठक में तय होगी जवाबदेही

 

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पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक बार फिर सक्रिय राजनीति में पूरी मजबूती से लौटने की तैयारी में हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार तेजस्वी यादव के 5 जनवरी को पटना लौटने की प्रबल संभावना है। उनकी वापसी से पहले 3 जनवरी को राजद की एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें हालिया चुनावी हार की गहन समीक्षा और भविष्य की रणनीति पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

 

पार्टी के भीतर इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में यह तय किया जाएगा कि चुनावी हार की जिम्मेदारी किन नेताओं और पदाधिकारियों पर तय की जाए। संगठनात्मक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं और कुछ नेताओं पर कार्रवाई की गाज गिरना भी तय माना जा रहा है। हालांकि, बैठक को लेकर अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

 

हार की समीक्षा, कार्रवाई के संकेत

राजद नेतृत्व इस बार केवल आत्ममंथन तक सीमित नहीं रहना चाहता। अंदरखाने से मिल रही जानकारी के अनुसार पार्टी ने चुनावी हार को लेकर विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कराई है। इस रिपोर्ट के आधार पर संगठन में बदलाव, जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण और निष्क्रिय या कमजोर प्रदर्शन करने वाले नेताओं पर कार्रवाई की तैयारी है।

 

विदेश दौरे के दौरान भी सक्रिय रहे तेजस्वी

पिछले कुछ समय से तेजस्वी यादव बिहार से बाहर थे, जिसको लेकर सत्ताधारी जदयू ने उन पर राजनीतिक हमले भी किए। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि इस दौरान भी तेजस्वी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लगातार संपर्क में रहे और संगठन की स्थिति पर नजर बनाए रखी। अब पटना लौटते ही वे सीधे तौर पर पार्टी और विपक्षी राजनीति की कमान संभाल सकते हैं।

 

जिला स्तर पर हो सकते हैं बड़े बदलाव

3 जनवरी की बैठक में जिला स्तर के नेताओं की भूमिका, चुनावी रणनीति की कमियां और गुटबाजी जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा होने की संभावना है। कुछ जिलाध्यक्षों, प्रभारियों और पदाधिकारियों को हटाने या उनकी जिम्मेदारियां बदलने जैसे फैसले लिए जा सकते हैं।

 

नए सिरे से संगठन खड़ा करने की तैयारी

राजद के भीतर यह भी चर्चा है कि तेजस्वी यादव पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की दिशा में काम करेंगे। युवाओं और नए चेहरों को आगे लाने, संगठन में अनुशासन लागू करने और जनसरोकार के मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाने की रणनीति पर जोर दिया जा सकता है। तेजस्वी की वापसी के साथ ही बिहार की राजनीति में विपक्ष की सक्रियता और धार तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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