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क्या लाल किले के आतंकियों के निशाने पर थे चांदनी चौक के गौरी-शंकर और जैन मंदिर?

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नई दिल्ली।
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास सोमवार शाम (10 नवंबर 2025) हुए भयंकर धमाके ने पूरे चांदनी चौक क्षेत्र को हिला कर रख दिया। अब सवाल उठ रहा है कि कहीं इस धमाके का असली निशाना प्रसिद्ध गौरी-शंकर मंदिर और जैन दिगंबर मंदिर तो नहीं थे? क्योंकि धमाका इन दोनों ही धार्मिक स्थलों से कुछ ही मीटर की दूरी पर हुआ, जिसकी तीव्रता का असर सीधा मंदिरों तक पहुंचा।

स्थानीय लोगों और मंदिर कर्मियों के मुताबिक, धमाके की आवाज इतनी जबरदस्त थी कि दोनों मंदिरों के शीशे पूरी तरह चकनाचूर हो गए। श्रद्धालु और पुजारी उस समय पूजा-पाठ में व्यस्त थे। अचानक हुए विस्फोट ने सभी को दहशत में डाल दिया।

जैन दिगंबर मंदिर में बिखरे कांच के टुकड़े

जैन दिगंबर मंदिर के पदाधिकारी प्रदीप जैन ने बताया, “धमाका इतना जोरदार था कि पूरे ऑफिस और मंदिर परिसर में सिर्फ कांच ही कांच बिखर गया। पहले लगा कि शायद मेरे कमरे में कोई गैस या बिजली की समस्या हुई है, लेकिन बाहर देखा तो भगदड़ मची थी और सड़क पर लोगों के शरीर के अंग बिखरे पड़े थे। इतने प्रेशर से ब्लास्ट हुआ कि दरवाजे तक जाम हो गए।”

गौरी-शंकर मंदिर में चल रही थी आरती

वहीं गौरी-शंकर मंदिर के एक पुजारी ने बताया कि “धमाके के वक्त मंदिर में पूजा चल रही थी। अचानक एक भयंकर आवाज हुई, जिससे दीवारें तक हिल गईं। खिड़कियों के शीशे टूटकर इधर-उधर बिखर गए। जीवन में पहली बार इतनी भयावह आवाज सुनी।”

क्या मंदिर थे आतंकियों का असली निशाना?

सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच में जुटी हैं कि क्या जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध आतंकी डॉ. मोहम्मद उमर का मकसद किसी बड़े धार्मिक स्थल को निशाना बनाना था? यह भी आशंका जताई जा रही है कि अगर कार कुछ मीटर और आगे बढ़ जाती, तो सैकड़ों श्रद्धालुओं से भरे इन मंदिरों में भारी जनहानि हो सकती थी।

फिलहाल दिल्ली पुलिस, एनआईए और एटीएस की टीमें जांच में जुटी हैं। लाल किले से लेकर चांदनी चौक तक सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। मंदिरों के आसपास पुलिस बल तैनात है, और आसपास के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

धमाके की गूंज अब भी चांदनी चौक के लोगों के दिलों में दहशत बनकर गूंज रही है — और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आतंकियों का असली निशाना दिल्ली की आस्था थी?

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