
मुंबई। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव 2026 से पहले मुंबई की सियासत में बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के रास्ते अलग हो गए हैं। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह मुंबई में बीएमसी चुनाव अकेले लड़ेगी, जबकि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को राज ठाकरे की मनसे के साथ गठबंधन में चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इस फैसले के साथ ही महाविकास आघाड़ी (MVA) के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मनसे बनी गठबंधन टूटने की वजह
कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के साथ मिलकर लड़े थे, लेकिन बीएमसी चुनावों में मनसे की एंट्री कांग्रेस को रास नहीं आई। कांग्रेस नेताओं का साफ कहना है कि मनसे के साथ किसी भी तरह का गठबंधन पार्टी की विचारधारा के खिलाफ है।
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“मनसे के साथ हाथ मिलाने का सवाल ही नहीं उठता। हमारी विचारधारा अलग है। अगर हम मनसे के साथ जाएंगे तो हमें कौन वोट देगा—उत्तर भारतीय, अल्पसंख्यक, मुसलमान?”
इसी कारण कांग्रेस ने मुंबई में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
उद्धव–राज ठाकरे की जोड़ी पर सस्पेंस
उधर, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ आने की चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में शिवसेना (यूबीटी)–मनसे गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी। यदि यह गठबंधन होता है, तो मुंबई की राजनीति में नए समीकरण बनना तय माना जा रहा है।
क्या बोले संजय राउत?
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का मन बना लिया है।
उन्होंने कहा, “हमारी कांग्रेस नेतृत्व से बातचीत हुई थी, लेकिन अब चर्चा रुक गई है।”
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने दोहराया कि यदि शिवसेना (यूबीटी) मनसे के साथ जाती है, तो कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ना तय है।
एमवीए में नई एंट्री के संकेत
इस बीच महाविकास आघाड़ी में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) की संभावित एंट्री की चर्चा भी तेज हो गई है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख डॉ. प्रकाश अंबेडकर से संभावित गठबंधन पर बातचीत की है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने बीएमसी में 20 प्रतिशत सीटें वीबीए को देने का प्रस्ताव रखा है, हालांकि वीबीए की ओर से अभी अंतिम फैसला नहीं आया है।
अजित पवार की एनसीपी भी असमंजस में
उधर, सत्तारूढ़ महायुति में भी एकजुटता के संकेत साफ नहीं हैं। सीट बंटवारे को लेकर अजित पवार की एनसीपी पर अब तक कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अजित पवार की पार्टी भी बीएमसी चुनाव अकेले लड़ सकती है, जबकि एनसीपी (एसपी) ने एमवीए में बने रहने की बात कही है।
मुंबई की राजनीति में नए समीकरण तय
कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव 2026 से पहले मुंबई की राजनीति में बड़े बदलाव साफ नजर आने लगे हैं। कांग्रेस का अकेले मैदान में उतरना, उद्धव–राज ठाकरे की संभावित जोड़ी और एमवीए में नई पार्टी की एंट्री—इन सभी घटनाओं ने साफ कर दिया है कि इस बार मुंबई का नगर निगम चुनाव काफी दिलचस्प और निर्णायक होने वाला है।