
नई दिल्ली: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेशकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर आई है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS को सब्सक्राइबर्स के लिए और आकर्षक, लचीला और फायदेमंद बनाने के लिए 10 बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव सरकारी, गैर-सरकारी और एनपीएस-लाइट सभी सब्सक्राइबर्स पर लागू होंगे।
मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
- निवेश की उम्र बढ़ी: अब सब्सक्राइबर्स 75 साल की बजाय 85 साल तक एनपीएस में निवेश जारी रख सकते हैं।
- एन्युटी खरीदने का विकल्प: अब गैर-सरकारी सब्सक्राइबर्स अपने जमा राशि का केवल 20% एन्युटी खरीदने में लगा सकते हैं।
- 100% रकम निकालने की सुविधा: जमा राशि 8 लाख रुपये तक होने पर सब्सक्राइबर्स अब पूरी राशि एक साथ निकाल सकते हैं।
- सिस्टमैटिक यूनिट रिडेम्पशन (SURS): अब सब्सक्राइबर्स अपने कॉर्पस से धीरे-धीरे, यानी किस्तों में पैसा निकाल सकते हैं। यह सुविधा कम से कम 6 साल की अवधि के लिए होगी।
- नए कॉर्पस स्लैब: जमा राशि के आधार पर अलग-अलग नियम तय किए गए हैं।
- 60 साल से पहले अधिक निकासी: अब 4 बार निकासी की अनुमति है (पहले 3 बार थी), निकासी के बीच कम से कम 4 साल का अंतर होना जरूरी है।
- 60 साल के बाद आंशिक निकासी: अब आंशिक निकासी के बीच 3 साल का गैप रखा गया है, और निकासी कुल योगदान का 25% तक सीमित है।
- एग्जिट की सुविधा: अब एनपीएस सब्सक्राइबर जो भारत का निवासी नहीं हैं, वे अपना खाता बंद कर पूरी राशि निकाल सकते हैं।
- लापता या मृत माने जाने वाले सब्सक्राइबर: नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को जमा राशि का 20% तुरंत मिलेगा, बाकी 80% निवेशित रहेगा।
- अकाउंट-सेंट्रिक अप्रोच: अब प्रत्येक खाता स्वतंत्र रूप से प्रबंधित होगा, जिससे खाते के स्तर पर स्वामित्व और नियंत्रण मजबूत हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है: ये बदलाव NPS को प्राइवेट सेक्टर और आम लोगों के लिए और अधिक आकर्षक, लचीला और उपयोगी बनाते हैं। अब निवेशक अपनी जरूरत और योजना के अनुसार सुविधाजनक निकासी और लंबी अवधि तक निवेश कर सकते हैं।