Friday, May 15

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पिछले पांच साल में करीब 9 लाख भारतीयों ने छोड़ी नागरिकता, सरकार ने संसद में दी जानकारी

नई दिल्ली: पिछले पांच वर्षों में लगभग 8.96 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी है। यह जानकारी केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में दी। आंकड़ों के अनुसार, 2022 के बाद नागरिकता छोड़ने वाले लोगों की संख्या में तेजी आई है।

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विवरण के अनुसार, 2020 में 85,256; 2021 में 1,63,370; 2022 में 2,25,620; 2023 में 2,16,219 और 2024 में 2,06,378 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी। वहीं, 2011 से 2019 के बीच 11,89,194 भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्यागी थी।

विदेशों में रहने वाले भारतीयों से प्राप्त शिकायतों के संबंध में मंत्री ने बताया कि 2024-25 में विदेश मंत्रालय को कुल 16,127 शिकायतें मिलीं। इनमें से 11,195 शिकायतें ‘मदद’ पोर्टल और 4,932 शिकायतें सीपीग्राम्स के माध्यम से दर्ज हुईं। सबसे अधिक संकट संबंधी मामले सऊदी अरब (3,049) से आए, इसके बाद यूएई, मलेशिया, अमेरिका, ओमान, कुवैत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कतर का क्रम रहा।

विदेश मंत्रालय ने प्रवासी भारतीयों की शिकायतों के समाधान के लिए एक मजबूत बहु-स्तरीय तंत्र तैयार किया है। इसमें इमरजेंसी हेल्पलाइन, वॉक-इन सुविधा, सोशल मीडिया और 24×7 बहुभाषी सहायता शामिल है। अधिकतर मामलों को सीधे संवाद, नियोक्ताओं से मध्यस्थता और विदेशी अधिकारियों के साथ समन्वय के जरिये सुलझाया जाता है।

मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में देरी की वजह अधूरी जानकारी, नियोक्ताओं का सहयोग न करना और अदालत में चल रहे मामलों में भारतीय मिशनों की सीमित भूमिका रही। प्रवासी भारतीयों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए दूतावास पैनल वकीलों और इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड की मदद ली जाती है।

केंद्रीय सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है और इसके लिए प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र एवं कांसुलर कैंप लगातार मार्गदर्शन और सहायता प्रदान कर रहे हैं।

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