बीएमसी चुनाव में मराठी अस्मिता और ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का युद्ध शुरू
मुंबई: 2026 के बीएमसी चुनाव में एक बार फिर राजनीतिक नैरेटिव ने स्थानीय मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है। मुंबई में अब बिजली, सड़क या पानी जैसे रोज़मर्रा के मुद्दों की जगह मराठी बनाम गैर-मराठी और हिंदुत्व बनाम अल्पसंख्यक वोटरों के मुद्दे ने चुनावी माहौल को घेर लिया है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मराठी मानुस और मराठी अस्मिता का भावनात्मक कार्ड खेलकर मराठी वोटों को एकजुट करने की रणनीति अपनाई है। उद्धव सेना ने यह दावा किया कि यदि मराठी वोट बंट गए, तो उनकी राजनीतिक ताकत कमजोर हो जाएगी और महाराष्ट्रियन समाज हाशिए पर चले जाएगा।
मराठी मेयर और मुस्लिम वोटों का खेल
उद्धव और मनसे ने मुंबई के मेयर पद को मराठी बनाने का मुद्दा उठाया। बीजेपी नेता कृपाशंकर सिंह के बयान पर आधारित यह राजनीति अचानक गरमाई, जिसमें कहा गया कि मीरा-भईंदर नगर निगम ...










