चार महीने पहले पति खोया, फिर भी मैदान में उतरीं रीता वर्मा: कैसे बदल दीं धनबाद की राजनीति
धनबाद: 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने धनबाद सीट से बड़े उलटफेर के तहत उम्मीदवार बदल दिया। पहले पार्टी ने लोकप्रिय नेता एके राय के सामने बिहार के पूर्व मंत्री सत्यनारायण दुदानी को उतारा था। नामांकन और प्रचार शुरू होने के बाद अचानक शीर्ष नेतृत्व ने दुदानी को हटाकर प्रोफेसर रीता वर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
पति की शहादत के बाद चुनावी मैदान में उतरीं
तब तक रीता वर्मा शहीद पुलिस अधीक्षक रणधीर वर्मा की पत्नी के रूप में चर्चित हो चुकी थीं। चार महीने पहले ही उन्होंने अपने पति को खोया था। भाजपा ने उनके प्रति जनसहानुभूति का फायदा उठाते हुए अंतिम समय में उन्हें उम्मीदवार बनाया।
रीता वर्मा ने राजनीति में कदम रखते ही धमाका किया। उन्होंने धनबाद की सीनियर नेता एके राय को करीब 85 हजार वोटों से हराकर तहलका मचा दिया। इसके बाद रीता वर्मा ने 1996, 1998 और 1999 में लगातार चुनाव जीतकर अपनी पकड़...










