Sunday, July 26

Bihar

घर बैठे करें जमीन या मकान की रजिस्ट्री, बुजुर्गों के लिए CM नीतीश का बड़ा तोहफा
Bihar, State

घर बैठे करें जमीन या मकान की रजिस्ट्री, बुजुर्गों के लिए CM नीतीश का बड़ा तोहफा

    पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के 80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए एक अहम सुविधा की घोषणा की है। अब इस उम्र के लोग फ्लैट या जमीन की रजिस्ट्री के लिए सरकारी कार्यालय का चक्कर नहीं लगाएंगे, बल्कि उनकी रजिस्ट्री उनके घर पर ही पूरी की जाएगी।   मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पहल सात निश्चय-3 के सातवें निश्चय 'सबका सम्मान-जीवन आसान' के तहत राज्य के नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाने के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि अक्सर बुजुर्ग नागरिकों को जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसे आसान बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।   कैसे मिलेगी सुविधा:   80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की चलंत निबंधन इकाई के माध्यम से दस्तावेजों का निबंधन उन...
तेजस्वी की चुप्पी या बड़े तूफान की आहट?  राजद के ‘मंथन काल’ के पीछे रणनीति तैयार
Bihar, Madhya Pradesh, State

तेजस्वी की चुप्पी या बड़े तूफान की आहट? राजद के ‘मंथन काल’ के पीछे रणनीति तैयार

        पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव बेहद कम बोल रहे हैं। मीडिया के सामने भी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं और काफी समय तक विदेश दौरे पर रहे। उनके इस मौन के पीछे कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजद सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर नई रणनीति तैयार कर ली है।   राजनीतिक जानकारों के अनुसार, तेजस्वी यादव का यह मौन ‘मंथन काल’ है। चुनावी हार के बाद पार्टी और संगठन के कई मुद्दों पर चिंतन करना आवश्यक होता है। तेजस्वी यादव इस समय सामाजिक समीकरण, संगठनिक मजबूती और आगामी चुनाव की रणनीति पर गहन मंथन कर रहे हैं।     गठबंधन और साथी दलों का मूल्यांकन   तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के साथी दलों की ताकत और कमजोरियों का मूल्यांकन किया है। पिछले चुनाव में बूथ स्तर पर गठबंधन की एकजुट...
तिरहुत में बिहार चुनाव का NDA का दबदबा, समृद्धि यात्रा में नीतीश कुमार दे सकते हैं जनता को ‘रिटर्न गिफ्ट’
Bihar, State

तिरहुत में बिहार चुनाव का NDA का दबदबा, समृद्धि यात्रा में नीतीश कुमार दे सकते हैं जनता को ‘रिटर्न गिफ्ट’

    पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मकर संक्रांति के बाद राज्यव्यापी ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं, विशेषकर ‘प्रगति यात्रा’ और ‘सात निश्चय’ के जमीनी क्रियान्वयन का मूल्यांकन करना है। यात्रा के कई चरण होंगे और इसमें तिरहुत प्रमंडल को विशेष महत्व दिया गया है।   तिरहुत प्रमंडल बिहार का ऐतिहासिक और प्रशासनिक केंद्र है, जिसमें छह जिले शामिल हैं: मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली। यहाँ कुल 49 विधानसभा सीटें हैं।   मुजफ्फरपुर: 11 सीटें पूर्वी चंपारण: 12 सीटें पश्चिम चंपारण: 9 सीटें सीतामढ़ी: 8 सीटें शिवहर: 1 सीट वैशाली: 8 सीटें   पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में तिरहुत मंडल NDA के लिए सबसे बड़ा किला साबित हुआ। जनता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत...
नीतीश कैबिनेट का बड़ा फैसला: मुंबई में बनेगा बिहार भवन, 314 करोड़ की मंजूरी; कृषि–शिक्षा में बंपर बहाली
Bihar, State

नीतीश कैबिनेट का बड़ा फैसला: मुंबई में बनेगा बिहार भवन, 314 करोड़ की मंजूरी; कृषि–शिक्षा में बंपर बहाली

  बिहार में रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में नीतीश सरकार ने अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 41 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इस बैठक का फोकस युवाओं को सरकारी नौकरी, प्रशासनिक सुधार और राज्य की राष्ट्रीय स्तर पर मौजूदगी को मजबूत करने पर रहा।   कैबिनेट के फैसलों से कृषि, शिक्षा और प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव की राह खुलेगी, वहीं मुंबई जैसे महानगर में बिहार की पहचान को भी नया आयाम मिलेगा।     कृषि विभाग में 694 नए पद, युवाओं को मिलेगा रोजगार   राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए बंपर बहाली को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने—   कृषि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 534 नए पद, पौध संरक्षण निरीक्षक के 160 पद,   इस तरह कुल 694 पदों के सृजन को स्वीकृति द...
न्याय से समृद्धि तक: 20 वर्षों में ‘सुशासन’ की 17वीं यात्रा, नीतीश के लिए क्यों लकी है चंपारण की धरती
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न्याय से समृद्धि तक: 20 वर्षों में ‘सुशासन’ की 17वीं यात्रा, नीतीश के लिए क्यों लकी है चंपारण की धरती

    बिहार की राजनीति में ‘यात्राओं के नायक’ के रूप में पहचान बना चुके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता के बीच उतरने जा रहे हैं। 16 जनवरी 2026 से वे अपनी 17वीं राज्यव्यापी ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा न केवल उनके बीस वर्षों के शासनकाल का लेखा-जोखा है, बल्कि आने वाले पांच वर्षों के विकास रोडमैप का भी संकेत मानी जा रही है।   नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्राओं का यह सिलसिला वर्ष 2005 की ‘न्याय यात्रा’ से शुरू हुआ था, जिसने सत्ता परिवर्तन की नींव रखी। अब 2025 के विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई बहुमत के साथ मिली प्रचंड जीत के बाद, ‘समृद्धि यात्रा’ उनके सुशासन को आर्थिक और सामाजिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिश है।     न्याय से समृद्धि तक का दो दशक लंबा सफर   12 जुलाई 2005 को तत्कालीन राबड़ी देवी सरकार के खिलाफ न्याय की आवाज बुलं...
मुंबई–पुणे एक्सप्रेस-वे मॉडल क्या है? इसी तर्ज पर बिहार में बनेंगे पांच नए हाईवे
Bihar, State

मुंबई–पुणे एक्सप्रेस-वे मॉडल क्या है? इसी तर्ज पर बिहार में बनेंगे पांच नए हाईवे

    बिहार में सड़कों और कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। पथ निर्माण एवं उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने घोषणा की है कि राज्य में मुंबई–पुणे एक्सप्रेस-वे मॉडल की तर्ज पर पांच नए एक्सप्रेस-वे बनाए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना तक की दूरी पांच घंटे के भीतर तय की जा सकेगी।   मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मुख्य फोकस राज्य की कनेक्टिविटी को मजबूत करना है, ताकि उद्योग, व्यापार और रोजगार को गति मिल सके। इसी लक्ष्य के तहत मास्टर रोड मैप पर तेजी से काम किया जा रहा है।     क्या है मुंबई–पुणे एक्सप्रेस-वे मॉडल?   मुंबई–पुणे एक्सप्रेस-वे देश का पहला सिक्स लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर है। इसकी कुल लंबाई लगभग 95 किलोमीटर है। इस एक्सप्रेस-वे का निर्म...
बिहार में निवेश को बढ़ावा: बंद मिलों के लिए लोन पैकेज, हर जिले में दौड़ेंगी ‘रोड एम्बुलेंस’
Bihar, State

बिहार में निवेश को बढ़ावा: बंद मिलों के लिए लोन पैकेज, हर जिले में दौड़ेंगी ‘रोड एम्बुलेंस’

    बिहार सरकार राज्य में औद्योगिक निवेश को गति देने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाने जा रही है। उद्योग एवं पथ निर्माण विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने घोषणा की है कि राज्य में बंद पड़ी मिलों और उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष लोन पैकेज लाया जाएगा। इसके साथ ही सड़कों की त्वरित मरम्मत के लिए प्रत्येक जिले में ‘रोड एम्बुलेंस’ की व्यवस्था की जाएगी।   डॉ. जायसवाल ने बताया कि यह लोन पैकेज उन निवेशकों के लिए होगा, जो बिहार में बंद पड़ी मिलों और उद्योगों को दोबारा शुरू करना चाहते हैं। इससे न केवल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।     हर जिले में बनेगा लैंड बैंक, 26 हजार करोड़ होंगे खर्च   उद्योग मंत्री ने बताया कि बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (ब...
दरभंगा राज की अंतिम महारानी: एक युग का अवसान, राष्ट्र के लिए अमिट विरासत
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दरभंगा राज की अंतिम महारानी: एक युग का अवसान, राष्ट्र के लिए अमिट विरासत

  दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के साथ ही न केवल मिथिला की राजशाही परंपरा का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया, बल्कि भारतीय इतिहास के उस दौर की अंतिम जीवित कड़ी भी टूट गई, जिसका सीधा संबंध संविधान सभा से था। वे महाराज कामेश्वर सिंह की पत्नी थीं, जो 1947 से 1950 तक संविधान सभा के सदस्य रहे और संविधान के मूल रजिस्टर पर ‘दरभंगा’ का नाम अंकित करने का गौरव प्राप्त किया।   महारानी कामसुंदरी देवी संविधान सभा के 284 सदस्यों की पत्नियों में अंतिम जीवित सदस्य थीं। उनके निधन के साथ ही भारतीय राजशाही की वह आखिरी निशानी भी इतिहास बन गई, जिसने राष्ट्र निर्माण में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया।     दरभंगा राज का अतुलनीय दान और राष्ट्र सेवा   दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह और महारानी कामसुंदरी देवी का योगदान केवल मिथिला तक सीमित नहीं रहा, बल्...
बिहार-झारखंड का सोन नदी विवाद 26 साल बाद सुलझा, अब तय हुआ पानी का बंटवारा
Bihar, State

बिहार-झारखंड का सोन नदी विवाद 26 साल बाद सुलझा, अब तय हुआ पानी का बंटवारा

      पटना: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर 26 साल से चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। दोनों राज्य अब पानी के बंटवारे के फार्मूले पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद जल्द ही मुख्य सचिव स्तर पर एमओयू (MoU) साइन किया जाएगा। बिहार सरकार ने इस संबंध में केंद्र को औपचारिक जानकारी भी भेज दी है।     विवाद की पृष्ठभूमि   सोन नदी के जल को लेकर पहला बड़ा वाणसागर समझौता 1973 में हुआ था। उस समय विवाद मुख्य रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच था क्योंकि झारखंड उस समय बिहार का हिस्सा था।   वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद झारखंड ने सोन नदी के पानी पर अपनी हिस्सेदारी की मांग शुरू कर दी। इसके बाद से दोनों राज्यों के बीच विवाद लंबित रहा।   ध्यान देने वाली बात यह है कि इस परियोजना की DPR 36 साल पहले तैया...
बिहार से दिल्ली गया था रोजगार के लिए, 26 साल बाद भी हत्या का नहीं मिला न्याय
Bihar, State

बिहार से दिल्ली गया था रोजगार के लिए, 26 साल बाद भी हत्या का नहीं मिला न्याय

    पटना/दिल्ली: बिहार के राम स्वरूप की हत्या का 26 साल पुराना मामला हाल ही में दिल्ली की अदालत में समाप्त हुआ। सबूतों की कमी के कारण अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि तीसरा आरोपी विजय, जो राम स्वरूप का साला भी है, अब तक फरार है।   राम स्वरूप 1999 में रोजगार के लिए दिल्ली गए थे और वहां एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करने लगे थे। अक्टूबर 1999 में उन्हें उत्तमनगर, मतियाला क्षेत्र के एक बंद गोदाम में मशीन के नीचे मृत पाया गया।   शुरुआती जांच में फैक्ट्री मालिक पप्पू यादव और मजदूर सकिंदर कुमार, विजय यादव और मोंटू यादव पर संदेह जताया गया। मोंटू को 2010 में इस मामले में बरी कर दिया गया था। करीब 26 साल बाद अदालत ने भी पप्पू यादव और सकिंदर को हत्या, साजिश और सबूत मिटाने के आरोपों से बरी कर दिया।     कोर्ट का निर्णय और कारण   अतिरिक्त सत्र न्याया...