न्यायालय की गरिमा और नागरिक मर्यादा लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति
न्यायिक सुधारों के साथ संस्थाओं के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण पर बल : डॉ. सत्यवान सौरभ
नई दिल्ली। न्यायपालिका लोकतंत्र का वह मजबूत स्तंभ है, जहाँ प्रत्येक नागरिक अंतिम उम्मीद लेकर पहुँचता है। इसलिए न्यायालय की गरिमा बनाए रखना केवल न्यायाधीशों या अधिवक्ताओं की ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी संवैधानिक जिम्मेदारी है। यह विचार प्रख्यात कवि, सामाजिक विचारक एवं स्तंभकार डॉ. सत्यवान सौरभ ने अपने विचार लेख "न्याय के मंदिर की गरिमा और नागरिक मर्यादा" में व्यक्त किए हैं।
डॉ. सौरभ ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सफलता न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास पर आधारित है। यदि न्यायालयों की कार्यवाही के दौरान अमर्यादित व्यवहार, अभद्र भाषा, धमकी या अव्यवस्था का वातावरण बनता है, तो इसका प्रभाव केवल किसी एक अदालत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हो...










