सुप्रीम कोर्ट: अंतरराष्ट्रीय संधियां राष्ट्र हित से प्रेरित हों, विदेशी दबाव में नहीं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि भारत को किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि में शामिल होने से पहले अपने राष्ट्रीय, आर्थिक और जनहित को सर्वोपरि रखना चाहिए। अदालत ने कहा कि संधियां केवल विदेशी सरकारों या कॉर्पोरेशनों के दबाव में नहीं बननी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस जे. बी. पारदीवाला ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कर समझौतों में अपनी टैक्स संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए और इसके दुरुपयोग की संभावनाओं को रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि संधियों में ऐसी शर्तें होनी चाहिए जो समय-समय पर समीक्षा योग्य हों और जिनमें देश की रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से फिर से बातचीत करने की गुंजाइश बनी रहे।
टाइगर ग्लोबल-फ्लिपकार्ट मामला
फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में अमेरिकी निवेशक टाइगर ग्लोबल के फ्लिपकार्ट से बाहर निकलने पर होने वाले कैपिटल ...










