ना बढ़ी फीस, ना बदली लाइफस्टाइल, फिर भी विदेश में पढ़ाई क्यों हो गई महंगी? रुपए की गिरावट ने बढ़ाया विदेशी डिग्री का खर्च, फाइनेंशियल प्लानिंग है जरूरी
नई दिल्ली: लाखों भारतीय छात्रों का सपना है विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करना, लेकिन पिछले एक साल में यह सपना महंगा होता जा रहा है, और इसका मुख्य कारण है भारतीय रुपये की गिरती वैल्यू।
विदेश में पढ़ाई की फीस और रेंट में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, न ही छात्रों की लाइफस्टाइल बदली है। इसके बावजूद पढ़ाई का खर्च कई लाख रुपये बढ़ गया है। पैरेंट्स और स्टूडेंट्स दोनों परेशान हैं, क्योंकि अपने बजट के हिसाब से विदेश में पढ़ाई की योजना बनाना अब कठिन हो गया है।
रुपए की गिरावट ने बढ़ाया खर्च:पिछले एक साल में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड और यूरो के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में एक स्टूडेंट का एक साल का टोटल खर्च 40,000 डॉलर था। जब डॉलर की वैल्यू 75 रुपये थी, तो खर्च 30 लाख रुपये था। अब जैसे ही डॉलर 83-85 रुपये के बराबर पहुंच गया है, खर्च बढ़कर 33-34 लाख रुपये हो गया है।...









