सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘हर घर मुकदमेबाजी में फंस सकता है’ – डोमेस्टिक वर्कर्स पर न्यूनतम मजदूरी पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने और उसे लागू करने का आग्रह किया गया था। इस मामले की पीठ का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने किया।
कोर्ट ने क्या कहा:
सीजेआई ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी तय होने पर उल्टा असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि ट्रेड यूनियनें हर घर को मुकदमेबाजी में घसीट सकती हैं। सीजेआई ने टिप्पणी की:
"हर घर मुकदमेबाजी में फंस जाएगा। एक बार न्यूनतम मजदूरी लागू हो गई, तो लोग काम पर रखने से कतराएंगे। गन्ना उद्योग की सारी यूनियनें बंद हो गईं। ऐसे ही ये यूनियन हर घर को मुकदमेबाजी में खींच सकती हैं।"
घरेलू कामगारों का शोषण और सुधार:
पीठ ने स्वीकार किया कि घरेलू कामगारों का शोषण होता है। लेकिन न्यायपालिका ने कहा कि इस मामले में कानून बनाने का काम विधायिका का...










