Friday, May 29

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नील कत्याल: भारतीय मूल के वकील जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ को चुनौती दी

वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के दुनिया भर में लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे मुख्य भूमिका निभाने वाले नील कत्याल हैं, जो भारतीय मूल के वकील हैं।

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नील कत्याल के माता-पिता भारत से अमेरिका गए थे। उनकी मां डॉक्टर और पिता इंजीनियर हैं। कत्याल का जन्म शिकागो में हुआ और उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेजयेल लॉ स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने यूएस सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क का काम किया और 2010 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा उन्हें एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल बनाया गया।

ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ तर्क

नील कत्याल ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल करके टैरिफ लगाए। उन्होंने कहा कि इस कानून में ‘टैरिफ’ या ‘टैक्स’ लगाने का कहीं उल्लेख नहीं है। अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स लगाने और व्यापार को विनियमित करने की शक्ति सिर्फ कांग्रेस के पास है। राष्ट्रपति अपनी मर्जी से कोई टैक्स नहीं लगा सकते।

दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े केस में मुख्य वकील चुनने के लिए वकीलों के बीच सिक्का उछाला गया, जिसे नील कत्याल ने जीता और वह इस मामले में मुख्य वकील बने। सुप्रीम कोर्ट ने उनके तर्कों को सही मानते हुए ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक घोषित किया।

कत्याल का करियर और उपलब्धियाँ

नील कत्याल ने अब तक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक बड़े केस लड़े हैं। उनके पिछले मामलों में 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट की संवैधानिक रक्षा और 2017 में ट्रंप के ट्रैवल बैन को चुनौती देना शामिल है।

कत्याल ने “Impeach: The Case Against Donald Trump” नाम की किताब भी लिखी है और उन्हें अकसर ‘डोनाल्ड ट्रंप का कानूनी सिरदर्द’ कहा जाता है। उन्हें US जस्टिस डिपार्टमेंट का एडमंड रैंडोल्फ अवॉर्ड और 2017 व 2023 में द अमेरिकन लॉयर द्वारा लिटिगेटर ऑफ द ईयर का सम्मान मिला।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति एकतरफा तरीके से टैक्स नहीं बदल सकते। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फैसले की आलोचना करते हुए इसे “बेवकूफी भरा” करार दिया और सोशल मीडिया पर लिखा कि अब वे एडजस्टमेंट प्रोसेस शुरू करेंगे और पहले से ज्यादा पैसा लेने की कोशिश करेंगे।

नील कत्याल के तर्कों ने यह साबित किया कि कानून और संविधान राष्ट्रपति के व्यक्तिगत अधिकारों से ऊपर हैं। उनके इस केस ने अमेरिकी इतिहास में एक संवैधानिक मील का पत्थर स्थापित किया।

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