
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बन रही कथित ‘बाबरी मस्जिद’ को लेकर राज्य की राजनीति में विवाद तेज हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने जेयूपी (JUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मस्जिद निर्माण के लिए आने वाली कुल फंडिंग का 50 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश से प्राप्त हुआ है।
सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर फंडिंग जुटाने के उद्देश्य से 28 सितंबर 2025 को एक सप्ताह के लिए बांग्लादेश गए थे और वहां से बांग्लादेशी डोनर्स व कथित संगठनों से आर्थिक सहयोग जुटाया गया।
“जमात और टीएमसी के बीच की कड़ी” होने का दावा
सुवेंदु अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर बांग्लादेशी संगठनों से जुड़े लोगों के संपर्क में हैं और वे पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच ममता बनर्जी के खिलाफ उठ रही लहर को रोकने के लिए कथित तौर पर टीएमसी की मदद कर रहे हैं।
उन्होंने यह तक दावा किया कि हुमायूं कबीर “जमात और टीएमसी के बीच की कड़ी” के रूप में काम कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि सीमा के दोनों ओर कट्टरपंथी ताकतें अपने ठिकाने मजबूत कर रही हैं, जिससे बंगाली हिंदुओं में चिंता बढ़ रही है।
हुमायूं कबीर का जवाब- “सुवेंदु अधिकारी होश खो चुके हैं”
बीजेपी नेता के आरोपों पर हुमायूं कबीर ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि सुवेंदु अधिकारी अपना होश खो चुके हैं और उनके आरोप पूरी तरह निराधार हैं। कबीर ने स्वीकार किया कि वे उस दौरान बांग्लादेश गए थे, लेकिन उनका उद्देश्य केवल दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना था।
उन्होंने कहा कि उनका पूरा ट्रिप शेड्यूल पारदर्शी है और यदि सुवेंदु अधिकारी चाहें तो वे उन्हें अपना पूरा यात्रा विवरण भेज सकते हैं। कबीर ने दावा किया कि वे 10 अक्टूबर को शाम 5 बजे मालदा के रास्ते भारत लौटे थे।
“फंडिंग पर शक है तो CBI-ED जांच कराएं”
हुमायूं कबीर ने कहा कि बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए पूरे भारत से लोगों ने खुलकर दान दिया है और सब कुछ पारदर्शी तरीके से किया गया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी को फंडिंग को लेकर संदेह है तो सीबीआई या ईडी से जांच कराई जा सकती है।
कबीर ने बताया कि उन्होंने 6 दिसंबर को मस्जिद की नींव रखी थी, जो कि उसी दिन की तारीख है जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई थी। इसी कारण इस निर्माण को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा बनी हुई है।
राज्य में बढ़ सकता है राजनीतिक तनाव
इस पूरे विवाद के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक मुद्दों पर बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी और अन्य दलों के बीच इस मामले को लेकर आगे भी आरोप-प्रत्यारोप बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
