
नई दिल्ली: भारतीय नौसेना ने एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। INS सुदर्शिनी ने अपनी दस महीने लंबी अंतर महासागरीय यात्रा ‘लोकायन-26’ के पहले पोर्ट कॉल को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह पोर्ट कॉल ओमान के सलालाह में हुआ। इस सफलता ने न सिर्फ भारतीय नौसेना की समुद्री पहुंच को बढ़ाया है, बल्कि ओमान के साथ द्विपक्षीय नौसैनिक संबंधों को भी मजबूत किया है।
ओमान के नौसेना अधिकारियों से हुई मुलाकात
यात्रा के दौरान INS सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने ओमान की नेवी के दक्षिणी नौसेना क्षेत्र कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल घैलानी और रॉयल नेवी ऑफ ओमान वेसल अल मोअजर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी के साथ बैठक की। इसके अलावा रॉयल नेवी के अधिकारियों के लिए गाइडेड टूर का आयोजन भी किया गया।
ट्रेनिंग शिप के रूप में विजिटर्स के लिए खुला
रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सेल ट्रेनिंग शिप विजिटर्स के लिए खुला था। इस दौरान स्कूली बच्चों सहित 600 से अधिक विजिटर्स को तीन मस्तूल वाले बार्क की पहली झलक दिखाई गई और नौसेना की समुद्री यात्रा की बारीकियों को समझाया गया।
22,000 समुद्री मील की महायात्रा
INS सुदर्शिनी अपने लोकायन-26 अभियान में समुद्री विरासत और “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए 22,000 समुद्री मील से अधिक की यात्रा तय करेगा। इस दौरान यह जहाज 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों का दौरा करेगा। इसके अलावा, INS सुदर्शिनी फ्रांस के एस्केल ए सेट और अमेरिका के न्यूयॉर्क में SAIL 250 जैसे अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप कार्यक्रमों में भी भाग लेगा।
यह अभियान न केवल भारतीय नौसेना की तकनीकी और रणनीतिक ताकत को प्रदर्शित करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग और भारत की समुद्री कूटनीति को भी मजबूती प्रदान करता है।
