Thursday, February 5

गाजियाबाद की तीन बहनों की मौत: पिता पर 2 करोड़ का कर्ज, जांच में नए खुलासे से बढ़ा सस्पेंस

गाजियाबाद: गाजियाबाद में नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन नाबालिग बहनों की मौत के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, परिवार की आर्थिक तंगी और पिता पर लगभग दो करोड़ रुपये का कर्ज इस त्रासदी के पीछे एक अहम कारण हो सकता है। हालांकि, पुलिस ने किसी खतरनाक ऑनलाइन गेम की भूमिका की पुष्टि नहीं की है।

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घटना के बाद शुरुआती बयान में पिता ने दावा किया था कि बच्चियां एक कोरियन गेम के टास्क से प्रभावित थीं। लेकिन जांच के बाद पुलिस ने ऐसे किसी गेम के अस्तित्व से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि लड़कियां कोरियन ड्रामा और डिजिटल कंटेंट से बेहद प्रभावित थीं, लेकिन मामला केवल मनोरंजन की लत का नहीं, बल्कि पारिवारिक और आर्थिक दबावों से भी जुड़ा हो सकता है।

आर्थिक संकट और पारिवारिक तनाव

पुलिस के अनुसार, लड़कियों के पिता चेतन कुमार स्टॉक ट्रेडिंग से जुड़े हैं और उन पर भारी कर्ज है। आर्थिक तंगी के चलते परिवार ने कई जरूरी चीजों में कटौती की थी। जांच में यह भी सामने आया कि कोविड के बाद बच्चियों की पढ़ाई छूट गई थी और उन्हें दोबारा स्कूल नहीं भेजा गया।

परिवारिक ढांचे को लेकर भी पुलिस ने बताया कि चेतन कुमार की दो शादियां हैं। दूसरी पत्नी उनकी पहली पत्नी की बहन है। परिवार में कुल पांच बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा मानसिक रूप से दिव्यांग बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक दबाव और पारिवारिक जटिलताएं मिलकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती थीं।

कमरे से मिले नोट और निजी सामग्री

पुलिस को लड़कियों के कमरे से एक आठ पन्नों की नोटबुक मिली है, जिसमें माता-पिता के नाम संदेश लिखा है। कमरे में कविता जैसी पंक्तियां, फिल्मी डायलॉग और परिवार की तस्वीरें एक घेरे में सजी मिलीं। एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ, जिसमें तीनों बहनों की तस्वीर वॉलपेपर के रूप में लगी थी और उन्होंने खुद को कोरियाई नाम दिए हुए थे।

कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिस ने तोड़कर खोला। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह साफ है कि घटना के पीछे कई कारणों का मिश्रण हो सकता है। फिलहाल हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस घटना को लेकर अफवाहों से बचें और आधिकारिक जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कंटेंट की लत, पारिवारिक संवाद की कमी और आर्थिक तनाव जैसे मुद्दों पर समाज को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

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