
वाराणसी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के खुशियारी गांव में शुरू हुई ग्रीन बिग्रेड की मुहिम अब पूरी ताजनगरी और आसपास के जिलों में बदलाव की बयार ला रही है। नशा मुक्ति, महिला सुरक्षा, बच्चों की पढ़ाई और गांवों में बुनियादी सुविधाओं तक के काम इस बिग्रेड ने वह सब कर दिखाया जो कानून और सरकारी प्रयास अकेले नहीं कर पाए।
महिलाओं का नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन
ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित इस अभियान ने जुआ और नशे जैसी कुरीतियों के खिलाफ सख्ती दिखाई। ‘मिशन शक्ति’ को बढ़ावा देना, बेटियों के जन्म पर ‘बेटी उत्सव’ मनाना, सफाई अभियान और स्वरोजगार से जोड़ने जैसी गतिविधियों में ग्रीन बिग्रेड की महिलाओं ने हर मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभाई है।
अब ये महिलाएं जेल में महिला कैदियों और उनके बच्चों को शिक्षित करने, पर्यावरण संरक्षण और फैक्ट्रियों के संचालन में भी आगे आई हैं। इन्हें पुलिस-प्रशासन का सहयोग प्राप्त है, जबकि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अभियान को व्यापक समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराए हैं।
8 जिलों तक फैला नेटवर्क
ग्रामीण इलाकों में जुआ और नशे के खिलाफ अभियान चलाने के लिए नौजवानों ने महिलाओं को तैयार किया और बेसिक सेल्फ-डिफेंस प्रशिक्षण दिया। ग्रीन ड्रेस के माध्यम से उन्हें पहचान और शक्ति भी मिली।
खुशियारी गांव से शुरू हुआ यह अभियान अब वाराणसी के दर्जनों गांवों के साथ-साथ मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया, जौनपुर, अयोध्या और फिरोजाबाद के लगभग 210 गांवों तक फैल चुका है। 2000 से अधिक महिलाएं हर सुबह हाथों में डंडा लेकर अपने इलाकों में सामाजिक सुधार अभियान पर निकलती हैं। इस पहल पर विदेशी फिल्म निर्माताओं ने डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है।
जेल में शिक्षा और कौशल विकास
होप वेलफेयर ट्रस्ट के माध्यम से महिलाओं ने जेल के अंधेरे में भी शिक्षा की रोशनी फैलाई। वाराणसी जिला जेल में बंदियों को शिक्षा और स्वरोजगार के प्रशिक्षण से जोड़ा गया। लगभग 80 महिला बंदियों को कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ा गया।
बेटी उत्सव और बिजली पहुंचाने का काम
नशा और महिला उत्पीड़न के खिलाफ अभियान में लीलावती ने ‘बेटी उत्सव’ की शुरुआत की। इसी तरह, खुशियारी गांव की आशा देवी के नेतृत्व में गांव में पब्लिक लाइट और बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई गई ताकि बच्चे रात में पढ़ाई कर सकें।
सशक्त प्रेरणास्रोत और सामाजिक सुधार
मिर्जापुर की शशि लता ने ग्रीन बिग्रेड से जुड़कर 37 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया और सिलाई केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया। देउरा गांव की निर्मला देवी ने लोकतांत्रिक जागरूकता अभियान के जरिए मतदान में 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी सुनिश्चित की।
राज्यपाल का सहयोग और रोजगार के अवसर
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल से सोनभद्र और मिर्जापुर में स्लिपर और चप्पल फैक्ट्रियों की स्थापना की गई, जिसमें अब सैकड़ों महिलाएं रोजगार पा रही हैं। इन महिलाओं ने एक साल की मेहनत से नशा, जुआ, बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों को जड़ से खत्म करने में अहम भूमिका निभाई है।