
जबलपुर: जबलपुर में पूर्व महापौर प्रभात साहू और उनके समर्थकों द्वारा एक पुलिसकर्मी से अभद्रता और वर्दी फाड़ने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। युगलपीठ ने निष्पक्ष जांच न होने पर मामला एसटीएफ जबलपुर को सौंपने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई में एसटीएफ को सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करनी होगी।
यह घटना लार्डगंज थाना क्षेत्र में हुई थी, जब वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी ने पूर्व महापौर को हेलमेट न पहनने पर रोका। आरोप है कि प्रभात साहू ने पुलिसकर्मी से अभद्रता की और समर्थकों ने मिलकर पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी। इसके बावजूद, राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ ही FIR दर्ज की और पीड़ित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया। घटना का वीडियो वायरल होने के बावजूद जांच निष्पक्ष नहीं हुई।
शुरुआती सुनवाई में युगलपीठ ने लार्डगंज थाना प्रभारी को FIR और केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “जब पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं है, तो वह आम जनता को सुरक्षा कैसे प्रदान करेंगे।”
मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दोनों मामलों में सही और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, इसलिए मामले की जांच अब एसटीएफ को सौंप दी गई है।