
दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर सोमवार सुबह एक लापरवाह चालक ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करीब 6 किलोमीटर तक उलटी दिशा में तेज रफ्तार कार दौड़ा दी। यह खतरनाक घटना 19 जनवरी की सुबह करीब 10:30 बजे की है। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, वरना तेज रफ्तार वाहनों के बीच आमने-सामने की टक्कर जानलेवा साबित हो सकती थी।
पेट्रोलिंग पर तैनात ट्रैफिक इंस्पेक्टर अजय यादव ने मेरठ से दिल्ली की ओर रॉन्ग साइड आती कार को देखा और तुरंत सरकारी वाहन से उसका पीछा किया। कार की रफ्तार काफी तेज थी, इसलिए उन्होंने यूपी गेट एग्जिट पॉइंट पर तैनात यातायात पुलिस से समन्वय कर वाहन को रोकने की योजना बनाई। अंततः इंदिरापुरम पॉइंट पर कार को रोका गया।
पुलिस ने चालक की गंभीर लापरवाही को देखते हुए कार सीज कर दी और 7 हजार रुपये का चालान काटा। एसीपी यातायात जियाउद्दीन ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर रॉन्ग साइड ड्राइविंग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।
डासना जाने से बचने के लिए लिया जानलेवा फैसला
पूछताछ में चालक की पहचान लक्की पटेल, निवासी नोएडा सेक्टर-62 के रूप में हुई। उसने बताया कि वह दिल्ली से आ रहा था और नोएडा जाना था, लेकिन गलती से दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे की लेन पर चढ़ गया। विजयनगर पहुंचने पर उसे डासना से यू-टर्न लेने की जानकारी मिली। समय बचाने के चक्कर में उसने एक्सप्रेसवे पर ही यू-टर्न लेकर उलटी दिशा में वाहन दौड़ा दिया। कार उसकी बहन ज्योति पटेल के नाम पर पंजीकृत है।
पुलिस ने चालक को कड़ी फटकार लगाते हुए भविष्य में इस तरह की लापरवाही न करने की चेतावनी दी।
वीडियो वायरल, लोगों में नाराजगी
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रॉन्ग साइड दौड़ती कार और सही दिशा में तेज रफ्तार से चलते वाहन साफ दिखाई दे रहे हैं। वीडियो ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एनएचएआई की मॉनिटरिंग पर सवाल
पूर्व में हुए हादसों के बाद एनएचएआई ने कंट्रोल रूम से एक्सप्रेसवे की निगरानी और नियम तोड़ने वालों पर त्वरित कार्रवाई के दावे किए थे। बावजूद इसके, इस घटना में कार करीब 6 किलोमीटर तक गलत दिशा में दौड़ती रही, लेकिन एनएचएआई के कंट्रोल रूम से पुलिस को कोई सूचना नहीं मिली।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरविंद कुमार ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि समन्वय में चूक कैसे हुई।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि एक्सप्रेसवे पर थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है। नियमों का पालन ही सुरक्षित सफर की सबसे बड़ी गारंटी है।