
इस्लामाबाद।
अमेरिका ने पाकिस्तान को उन 75 देशों की सूची में शामिल किया है, जिन पर वीजा बैन लागू किया गया है। अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो ने यह कदम इमिग्रेशन को लेकर उठाया है, जिससे पाकिस्तान में चर्चा और आलोचना तेज हो गई है।
पाकिस्तान पिछले साल मई में भारत के साथ तनाव के बाद डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तारीफ कर रहा था। देश ने ट्रंप को मध्यस्थता का श्रेय दिया और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी किया था। ट्रंप ने पाकिस्तान की सेना और अधिकारियों की सार्वजनिक मंचों पर तारीफ भी की थी।
लेकिन जनवरी 2026 के पहले महीने में अमेरिका ने पाकिस्तान को वीजा बैन लिस्ट में डाल दिया। इसी समय पाकिस्तान के प्रमुख व्यवसायी असीम मुनीर और ISI के डीजी ने क्रिप्टो माइनिंग डील साइन की थी। इससे पाकिस्तान में लोगों का मानना है कि निजी फायदे देने के बावजूद देश को कोई फायदा नहीं हुआ।
पाकिस्तानी जनता की नाराजगी
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों ने सवाल उठाए कि ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने और तारीफ करने का क्या लाभ हुआ। यूजर्स ने लिखा कि “इतनी चापलूसी के बाद भी वीजा बैन लग गया।”
विशेषज्ञ हुसैन हक्कानी ने लिखा कि पाकिस्तान का पासपोर्ट अभी भी दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट में से एक है। 2026 में यह 31 वीजा-फ्री देशों के साथ 98वें स्थान पर है, जबकि 2025 में यह 103वें स्थान पर था।
अमेरिका का संदेश
विश्लेषकों का कहना है कि यह वीजा बैन ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति में पाकिस्तान की स्थिति को स्पष्ट करता है। पाकिस्तान में मिलिट्री और नेताओं की कोशिशें, चाहे ट्रंप की तारीफ या नोबेल नॉमिनेशन क्यों न हों, देश के हित में कोई प्रभाव नहीं डाल पा रही हैं।
