Thursday, January 15

दो महीने की राहत के बाद लौटी महंगाई की आहट, थोक महंगाई 8 महीनों के उच्चतम स्तर पर

नई दिल्ली।
दो महीने की शांति के बाद महंगाई की डायन एक बार फिर सक्रिय हो गई है। खाद्य पदार्थों और कारखानों में बनी वस्तुओं के दाम बढ़ने से दिसंबर में थोक महंगाई दर (WPI) आठ महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दो महीने तक निगेटिव रहने के बाद थोक महंगाई दर फिर से शून्य से ऊपर आ गई है।

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में थोक महंगाई दर 0.83 प्रतिशत रही। इससे एक साल पहले दिसंबर 2024 में यह 2.57 प्रतिशत थी।

 

दो महीने बाद पॉजिटिव हुई महंगाई दर

अक्टूबर 2025 में थोक महंगाई दर माइनस 1.02 प्रतिशत और नवंबर में माइनस 0.32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। यानी लगातार दो महीनों तक कीमतों में गिरावट के बाद दिसंबर में महंगाई ने फिर से सिर उठा लिया।

मंत्रालय के मुताबिक,
खनिज पदार्थों, मशीनरी, टेक्सटाइल्स और कारखानों में बने खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण थोक महंगाई दर पॉजिटिव हुई है।

 

खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े, राहत अभी पूरी नहीं

दिसंबर में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर बढ़कर माइनस 0.43 प्रतिशत हो गई, जबकि नवंबर में यह माइनस 4.16 प्रतिशत थी।
विशेष रूप से अनाज, दालों और सब्जियों के थोक भाव में महीने-दर-महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

 

मैन्युफैक्चरिंग और नॉनफूड सेक्टर में भी तेजी

कारखानों में बनी वस्तुओं (मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) में थोक महंगाई दर दिसंबर में बढ़कर 1.82 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 1.33 प्रतिशत थी।
वहीं, नॉन-फूड कैटेगरी में महंगाई दर 2.95 प्रतिशत रही, जो नवंबर में 2.27 प्रतिशत थी।

 

क्या कहते हैं अर्थशास्त्री?

केयरएज की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का कहना है कि फिलहाल महंगाई स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है।
उन्होंने कहा,
कुल मिलाकर थोक महंगाई अभी कंफर्टेबल स्तर पर है। खेती-बाड़ी की बेहतर स्थिति, अनुकूल बेस इफेक्ट और जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर के चलते आने वाले समय में खाद्य कीमतों पर दबाव सीमित रह सकता है।”

 

आगे क्या रह सकता है महंगाई का रुख?

सिन्हा के मुताबिक,
पिछले वर्ष के कम बेस इफेक्ट के कारण आने वाले महीनों में थोक महंगाई में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, लेकिन इसके बावजूद महंगाई नरम बनी रहने की संभावना है।
उन्होंने अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में औसतन थोक महंगाई दर 0.4 प्रतिशत के आसपास रह सकती है।

 

निष्कर्ष

दिसंबर के आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि महंगाई ने फिर से करवट ली है, लेकिन फिलहाल हालात बेकाबू नहीं हैं। हालांकि, खाद्य वस्तुओं और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ती कीमतों पर सरकार और नीति-निर्माताओं की नजर बनी रहना जरूरी होगी, ताकि आम जनता पर महंगाई का बोझ दोबारा भारी न पड़े।

 

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