
संभल: यूपी के संभल में दो साल पहले हुई हिंसा का मामला फिर चर्चा में है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने तत्कालीन एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद एसपी कृष्ण कुमार विष्णोई ने मुकदमा दर्ज नहीं करने की बात कही और कहा कि हिंसा की पहले ही न्यायिक जांच हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वे कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
पिछली असफल कोशिशें
यह पहला मामला नहीं है जब संभल पुलिस ने मजिस्ट्रेट के एफआईआर आदेश का पालन करने से इनकार किया हो। दिसंबर पिछले साल, पुलिस ने एक एसएचओ और 12 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया था, जिन पर लूट के मामले में झूठा फंसाने का आरोप था। यह आदेश भी सीजेएम सुधीर ने दिया था।
कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भुवन राज का कहना है कि पुलिस अधिकारी न्यायिक निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। पुलिस के पास आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने का अधिकार है, लेकिन जब तक एफआईआर रद्द नहीं होती, तब तक उसे लागू किया जाना चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता यादवेंद्र कृष्ण ने कहा, “यह अदालत की अवमानना का मामला है। कोई भी पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट के आदेश को अवैध नहीं कह सकता। एफआईआर दर्ज होने के बाद ही इसे चुनौती दी जा सकती है।”
यामीन की याचिका से उठा विवाद
यह विवाद खग्गू सराय अंजुमन इलाके के निवासी यामीन की शिकायत से शुरू हुआ। यामीन ने आरोप लगाया कि मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा में उनके बेटे आलम को गोली लगी थी। यामीन ने अदालत में कहा कि उनका बेटा खाना बेचने के लिए बाहर निकला था, तभी वह गोली लगने से घायल हुआ।