Thursday, May 14

This slideshow requires JavaScript.

उस्मान ख्वाजा का संन्यास: ऑस्ट्रेलिया ने दिया मौका, लेकिन ‘रंग’ के कारण खुद को अलग महसूस करता रहा – ख्वाजा

 

This slideshow requires JavaScript.

ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने 39 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी में खेला जाने वाला पिंक टेस्ट उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। करीब 15 वर्षों तक ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने वाले ख्वाजा ने संन्यास के साथ ही अपने करियर से जुड़े कुछ कड़वे अनुभव भी सार्वजनिक किए हैं।

 

पाकिस्तान में जन्मे उस्मान ख्वाजा चार साल की उम्र में अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया आ गए थे। उन्होंने 2010-11 एशेज सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू किया और अब तक 87 टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

 

‘टीम में रहते हुए भी खुद को अलग महसूस किया’

 

संन्यास की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में ख्वाजा ने कहा कि वह हमेशा खुद को टीम के भीतर थोड़ा अलग महसूस करते रहे। उन्होंने इसके पीछे अपनी पृष्ठभूमि और रंग को कारण बताया।

ख्वाजा ने कहा, “ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है और इसका हिस्सा होना मेरे लिए गर्व की बात रही। लेकिन कई मौकों पर मुझे ऐसा लगा कि मेरे साथ व्यवहार अलग तरह का रहा। मैं एक ‘कलर्ड’ क्रिकेटर हूं और यह भावना आज भी मेरे भीतर है।”

 

पूर्व क्रिकेटरों और मीडिया पर लगाए आरोप

 

उस्मान ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलिया के कुछ पूर्व क्रिकेटरों और मीडिया की आलोचना करते हुए कहा कि चोट के दौरान उन्हें जरूरत से ज्यादा निशाना बनाया गया।

उन्होंने कहा, “मेरी पीठ में ऐंठन थी, जो मेरे नियंत्रण में नहीं थी। लेकिन जिस तरह से मुझ पर हमले किए गए, वह सामान्य नहीं था। दो दिन तक आलोचना सहना ठीक है, लेकिन लगातार पांच दिन तक मुझे निशाना बनाया गया।”

 

‘दूसरे खिलाड़ियों को इतनी आलोचना नहीं झेलनी पड़ी’

 

ख्वाजा का मानना है कि कई अन्य खिलाड़ियों को इसी तरह की परिस्थितियों में उतनी आलोचना नहीं झेलनी पड़ी, जितनी उन्हें झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि आज भी उन्हें ऐसी बातों से रोज़ जूझना पड़ता है, जो बेहद निराशाजनक है।

 

उस्मान ख्वाजा का करियर न सिर्फ उनके शानदार प्रदर्शन के लिए याद किया जाएगा, बल्कि उन सवालों के लिए भी, जो उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में समानता और व्यवहार को लेकर उठाए हैं।

 

 

Leave a Reply