
देश के तीन छात्रों ने कॉलेज कैंपस की रोजमर्रा की समस्याओं को बड़े और असरदार आइडियाज में बदलकर गूगल का दिल जीत लिया। इन छात्रों ने अपने प्रोजेक्ट्स तैयार करने में गूगल Gemini को थिंकिंग पार्टनर बनाया और उसे सोचने, समझने और पेश करने में मदद ली। खास बात यह है कि ये प्रोजेक्ट्स किसी बड़ी लैब या कंपनी से नहीं, बल्कि कॉलेज लाइफ की छोटी-छोटी परेशानियों से निकले हैं।
तीन छात्रों के प्रोजेक्ट्स:
- Feko Pay – हार्दिक सचान (दिल्ली)
कैंपस कैफे में दोस्तों के साथ खाने के बाद बिल बांटने की समस्या को हल किया।
ऐप बिल की फोटो स्कैन करके हर किसी का हिस्सा तय करता है।
- Swappr – गर्वित दुडेजा (जयपुर)
हॉस्टल में पड़े अनयूज्ड सामान को कैंपस में एक्सचेंज करने के लिए गेम-जैसा प्लेटफॉर्म बनाया।
किताबें, इलेक्ट्रॉनिक्स और गिटार जैसी चीजें आपस में स्वैप की जा सकती हैं।
- Rest In Pieces – भावना एल. (सलेम, तमिलनाडु)
सीनियर्स के पुराने प्रोजेक्ट्स और हार्डवेयर को दोबारा उपयोग लायक बनाकर जूनियर्स तक पहुंचाने का सिस्टम तैयार किया।
अन्य शानदार प्रोजेक्ट्स:
पी. एस. साई. विकास (बेंगलुरु): 24×7 ऑटोमैटिक प्रिंटआउट मशीन।
देविका मुकुंदन (त्रिशूर): कैंटीन के बचे खाने की मात्रा एनालाइज कर फूड प्लानिंग।
शिवम सैनी (पानीपत): स्टूडेंट ट्रैवल नेटवर्क, सुरक्षित और किफायती सफर विकल्प।
हर्षल अशोक सूर्यवंशी (कोल्हापुर): डिजिटल आउट-पास सिस्टम, मोबाइल से अप्रूवल।
आदित्य राव (चेन्नै): रोबॉटिक मंकी हनीपॉट, बंदरों से फसल और घर की सुरक्षा।
डैनी मैथ्यू और ईश्वर आनंद बदुगु: रिसर्च डेटा को मॉक-अप्स और प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस में बदलना।
गूगल Gemini की भूमिका:
Gemini ने छात्रों के विचारों को स्ट्रक्चर, क्लैरिटी और प्रेजेंटेशन दिया। सिर्फ टॉप 3 ही नहीं, बल्कि बाकी फाइनलिस्ट्स के लिए भी यह एक मजबूत थिंकिंग पार्टनर साबित हुआ।
निष्कर्ष:
छोटे-छोटे कॉलेज कैंपस के आइडियाज को गूगल जैसी कंपनी ने मान्यता दी। यह साबित करता है कि साधारण समस्याओं से भी बड़े और उपयोगी समाधान निकाले जा सकते हैं, अगर सही तकनीक और सोच का इस्तेमाल किया जाए।