
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए झांसी स्थित केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) कार्यालय में फैले रिश्वतखोरी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में आईआरएस अधिकारी व डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी के मामले में एक हार्डवेयर कारोबारी को राहत देने के बदले डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी, जिसकी डीलिंग बीते आठ दिनों से चल रही थी।
सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने प्रभा भंडारी को उनके दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तार किया, जबकि अन्य चार आरोपियों को झांसी से दबोचा गया। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने 70 लाख रुपये की रिश्वत की रकम, इसके अलावा 1.60 करोड़ रुपये नकद, भारी मात्रा में सोना-चांदी के आभूषण और संपत्तियों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।
वकील बना डील का सूत्रधार
इस पूरे मामले में जीएसटी मामलों के वकील नरेश कुमार गुप्ता की भूमिका अहम बताई जा रही है, जो अफसरों और कारोबारी के बीच डील का सूत्रधार था। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में हार्डवेयर कारोबारी राजू मंगनानी, अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, करीब आठ दिन पहले जय दुर्गा हार्डवेयर पर केंद्रीय जीएसटी टीम ने छापा मारा था। इसके बाद टैक्स चोरी के मामले को रफा-दफा करने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की घूस की मांग की गई। लगातार बातचीत के बाद आखिरकार सौदा 70 लाख रुपये में तय हुआ।
भागने की कोशिश में कारोबारी घायल
सीबीआई की कार्रवाई के दौरान जब कारोबारी और वकील को पकड़ा जा रहा था, तो दोनों ने भागने की कोशिश की। इस दौरान कारोबारी के पैर में चोट भी आई। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इस ऑपरेशन से पहले स्थानीय स्तर पर पुख्ता इनपुट जुटा लिए गए थे, लेकिन विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी को कार्रवाई में शामिल नहीं किया गया।
विभाग में मचा हड़कंप
सीबीआई की इस सख्त कार्रवाई से सीजीएसटी विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच जारी है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।