Friday, May 15

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IAF के ‘उड़ने वाले टैंक’ होंगे इतिहास, स्वदेशी ‘प्रचंड’ बनेगा दुश्मनों के लिए काल

 

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नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना (IAF) अपने हेलीकॉप्टर बेड़े में ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रही है। चार दशक तक आसमान में दुश्मनों पर कहर बरपाने वाले सोवियत-निर्मित Mi-35 अटैक हेलीकॉप्टर अब धीरे-धीरे सेवा से हटाए जाएंगे। इनकी जगह अब भारत में विकसित अत्याधुनिक लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ लेगा, जो खास तौर पर ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में युद्ध के लिए तैयार किया गया है।

 

‘उड़ने वाले टैंक’ का युग समाप्त

 

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, Mi-35 हेलीकॉप्टरों को 2030–31 तक पूरी तरह रिटायर कर दिया जाएगा। Mi-25 और Mi-35 अपनी भारी बख्तरबंद संरचना और सैनिकों को ले जाने की क्षमता के कारण ‘फ्लाइंग टैंक’ कहे जाते थे। इन्हें 1980 और 1990 के दशक में वायुसेना में शामिल किया गया था। कुछ हेलीकॉप्टर पहले ही सेवानिवृत्त किए जा चुके हैं, जबकि कुछ मित्र देशों को सौंपे गए हैं।

 

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि ये हेलीकॉप्टर मजबूत जरूर थे, लेकिन आधुनिक युद्धक्षेत्र—खासकर पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों—के लिए उतने फुर्तीले और गुप्त नहीं रह गए थे।

 

‘प्रचंड’ संभालेगा मोर्चा

 

Mi-35 की विदाई के साथ अब HAL द्वारा विकसित ‘प्रचंड’ वायुसेना और थलसेना की मुख्य ताकत बनेगा। इसकी जरूरत 1999 के कारगिल युद्ध के बाद महसूस हुई, जब यह साफ हो गया कि भारत को ऐसे अटैक हेलीकॉप्टर चाहिए जो अत्यधिक ऊंचाई पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकें।

 

‘प्रचंड’ दुनिया का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर है जो 5,000 मीटर (16,400 फीट) की ऊंचाई पर उतरने और उड़ान भरने में सक्षम है। यह क्षमता इसे सियाचिन ग्लेशियर, पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) जैसे इलाकों के लिए बेहद अहम बनाती है।

 

तकनीक और ताकत का संगम

 

‘प्रचंड’ में अत्याधुनिक एवियोनिक्स, शक्तिशाली इंजन और स्टील्थ फीचर्स लगाए गए हैं, जो इसे दुश्मन के रडार से बचने में मदद करते हैं। यह हेलीकॉप्टर कम ऊंचाई और अत्यधिक ऊंचाई—दोनों परिस्थितियों में सटीक हमला करने में सक्षम है।

 

अपाचे और प्रचंड की जोड़ी

 

Mi-35 के हटने से वायुसेना की मारक क्षमता में कोई कमी नहीं आएगी। IAF के पास पहले से ही 22 अमेरिकी AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर हैं, जिन्हें 2019 से 2021 के बीच शामिल किया गया था। अपाचे भारी ‘टैंक-बस्टर’ के रूप में जाने जाते हैं।

 

भविष्य में भारतीय वायु सेना का अटैक हेलीकॉप्टर बेड़ा अपाचे और प्रचंड के रणनीतिक संयोजन पर आधारित होगा। रक्षा मंत्रालय ने 156 ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इनमें से 66 वायुसेना और 90 थलसेना के एविएशन कोर को मिलेंगे। इनकी डिलीवरी 2028 से शुरू होगी।

 

आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम

 

Mi-35 की विदाई और ‘प्रचंड’ की तैनाती केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की मजबूत घोषणा है। यह बदलाव न सिर्फ भारत की युद्धक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य के पहाड़ी और सीमावर्ती संघर्षों में निर्णायक बढ़त भी दिलाएगा।

 

 

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