Monday, January 12

सबका बीमा, सबकी रक्षा: 100% एफडीआई के बावजूद भारतीय ही रहेगा ‘बॉस’

नई दिल्ली: संसद ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 100% तक बढ़ाने वाले ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी है। इस कदम से देश के बीमा क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी, सार्वजनिक कंपनियों को मजबूती मिलेगी और आम लोगों व किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विदेशी निवेश से बेहतर तकनीक उपलब्ध होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 100% एफडीआई की अनुमति मिलने के बावजूद शीर्ष पदों पर भारतीय नागरिक ही नियुक्त होंगे।

FDI बढ़ाने के फायदे:

  • बीमा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
  • उपभोक्ताओं को बेहतर और विविध बीमा उत्पाद उपलब्ध होंगे।
  • सार्वजनिक बीमा कंपनियों को वित्तीय मजबूती मिलेगी।
  • ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में बीमा पहुँच आसान होगी।
  • बीमा दावों का निपटान तेज और पारदर्शी होगा।

महत्वपूर्ण प्रावधान:

  • विदेशी निवेश की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% की गई।
  • अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या CEO भारतीय नागरिक होंगे।
  • गैर-बीमा कंपनियों का बीमा कंपनियों में विलय आसान होगा।
  • पूर्णकालिक सदस्यों का कार्यकाल 5 साल या 65 वर्ष की आयु तक।

सुदूर इलाकों में बीमा सुविधा:

सरकार ने पुनर्बीमा कंपनियों के लिए शुद्ध स्वामित्व निधि की आवश्यकता को 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आम लोगों को वहनीय मूल्य पर बीमा उपलब्ध कराना है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास:

‘बीमा सखी’ पहल के तहत लगभग 2.20 लाख महिलाओं को बीमा एजेंट के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो अपनी आजीविका कमा रही हैं।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि विधेयक से विदेशी निवेश के साथ भारतीय कंपनियों को अत्याधुनिक तकनीक अपनाने का मौका मिलेगा और बीमा उत्पादों की गुणवत्ता तथा सेवाओं में सुधार होगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस उदारीकरण का लाभ सीधे अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचे।

निष्कर्ष: यह विधेयक बीमा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिससे क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा और देश के आर्थिक विकास में योगदान देगा।

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