Covid-19: ‘डेल्टा वेरिएंट’ वैक्सीन की क्षमता को कर रहा कम, विशेषज्ञों का दावा – ज्यादा संक्रामक है


भारत में मिले Covid-19 के डेल्टा वेरिएंट को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा है कि यह वेरिएंट अल्फा वेरिएंट से ज्यादा संक्रामक है। यूके के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि डेल्ट वेरिएंट, अल्फा वेरिएंट से 60 फीसदी ज्यादा संक्रामक है और कुछ मामलों में यह वेरिएंट वैक्सीन की क्षमता को भी कम कर देता है।

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई), चिंता बढ़ाने वाले कोरोना के हर वेरिएंट को साप्ताहिक तौर पर ट्रैक करती है। पीएचई ने कहा है कि डेल्टा वेरिएंट संक्रमण के केस देश में 29,892 से बढ़कर 42,323 हो गए हैं। इन केसों में 70 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। डेटा यह भी इशारा कर रहा है कि यूके में कोविड-19 के 90 प्रतिशत नए केस डेल्टा वेरिएंट से संबंधित हैं। अल्फा की तुलना में डेल्टा वेरिएंट केस काफी बढ़ रहे हैं। पीएचई के द्वारा किये गये नए रिसर्च में कहा गया है कि घर में डेल्टा के ट्रांसमिशन का रिस्क अल्फा की तुलना में 60 फीसदी ज्यादा है। डेल्टा वेरिएंट से जुड़े केस तेजी से बढ़ रहे हैं।

इंग्लैंड और स्कॉटलैंड ने वैक्सीन पर डेल्टा और अल्फा के प्रभाव को लेकर भी रिसर्च किया है। इस रिसर्च में यह बात सामने आई है कि वैक्सीन का पहला डोज पड़ने के बाद डेल्टा वेरिएंट अल्फा वेरिएंट की तुलना में ज्यादा तेजी से वैक्सीन के प्रभाव को कम कर देता है। पीएचई की तरफ से कहा गया है कि यूके में डेल्टा वेरिएंट के नए केसों की संख्या बढ़ी है। पीएचई की तरफ से कहा गया है कि अभी आने वाले हफ्तों में इस वेरिएंट पर करीब से नजर रखी जाएगी। मौजूदा डेटा के हवाले से कहा गया है कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम को तेजी से चलाया जाए ताकि इस वेरिएंट के प्रभाव को कम किया जा सके।

यूके हेल्थ सिक्यूरिटी एजेंसी के चीफ एग्जीक्यूटिव डॉक्टर जेनी हैरिस ने कहा कि ‘जिस तरह से डेल्ट वेरिएंट के केस देश में बढ़ रहे हैं, वैक्सीनेशन ही हमारा सबसे बेहतरीन बचाव है। अगर आप योग्य हैं तो हम आपसे गुजारिश करते हैं कि आगे आईए और वैक्सीन लीजिए। याद रहे कि 2 डोज एक डोज से ज्यादा प्रभावकारी है और सुरक्षात्मक भी है।’



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