Tuesday, August 11

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सारण: उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘एक्सप्रेस हाईवे’ दावे, हकीकत में बिहार की सड़कें पीछे

 

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सारण/पटना। बिहार के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सारण जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान जनसभा में दावा किया कि बिहार में सड़क नेटवर्क उत्तर प्रदेश, झारखंड, बंगाल और नेपाल से भी अधिक है। हालांकि, वास्तविक आंकड़े बताते हैं कि यह दावा अतिशयोक्तिपूर्ण है।

 

सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक-एक गांव तक सड़क और बिजली पहुंचाई है। उन्होंने बताया कि पहले सारण में 5 घंटे से अधिक बिजली नहीं होती थी, अब 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने लगभग 1.90 करोड़ परिवारों को 125 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान की है।

 

वास्तविक आंकड़े

बिहार के पथ निर्माण विभाग के अनुसार, राज्य में कुल शहरी सड़कें 26,791 किलोमीटर हैं, जिनमें केवल 7% यानी 1,973 किलोमीटर चार लेन या उससे अधिक चौड़ी हैं। नेशनल हाईवे की कुल लंबाई 6,389 किलोमीटर है, जिसमें चार लेन या उससे अधिक की सड़कें केवल 1,816 किलोमीटर हैं। स्टेट हाईवे की कुल लंबाई 3,617 किलोमीटर है, जबकि शहरों की प्रमुख सड़कें (MDR) 16,784 किलोमीटर लंबी हैं, जिनमें केवल 116 किलोमीटर चार लेन की हैं।

 

राष्ट्रीय तुलना

राष्ट्रीय औसत के अनुसार प्रति लाख आबादी पर 10.90 किलोमीटर नेशनल हाईवे उपलब्ध है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा मात्र 4.54 किलोमीटर है। बिहार में 2019 में कुल सड़क नेटवर्क 2,98,205 किलोमीटर था। इसके मुकाबले उत्तर प्रदेश में लगभग 18.37 लाख किलोमीटर, पश्चिम बंगाल में 92,000 किलोमीटर और झारखंड में 28,000 किलोमीटर सड़कें हैं। नेपाल में सड़कें लगभग 36,132 किलोमीटर लंबी हैं। इसका मतलब है कि उत्तर प्रदेश में सड़कों की लंबाई बिहार से लगभग छह गुना अधिक है।

 

विकास की तस्वीर

हालांकि बिहार ने पिछले वर्षों में ग्रामीण सड़क निर्माण और सुदृढ़ीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण और प्रबंधन कार्यक्रम के तहत 18,166 सड़कों का निर्माण हुआ, जिनकी कुल लंबाई लगभग 30,965 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना के तहत 2025-26 में 31,604 बसाहटों के लिए 43,431 किलोमीटर सड़क का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 34,414 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है।

 

उप मुख्यमंत्री के दावे और वास्तविक आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर दर्शाता है कि बिहार ने सड़कों के निर्माण में प्रगति जरूर की है, लेकिन प्रदेश का सड़क नेटवर्क राष्ट्रीय औसत और पड़ोसी राज्यों की तुलना में अभी भी पीछे है।

 

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