Tuesday, August 11

This slideshow requires JavaScript.

सफलता की कहानी: नौकरी छोड़ मधुमक्खियों की दोस्ती ने बदल दी किस्मत, अब सालाना 65 लाख का टर्नओवर

 

This slideshow requires JavaScript.

 

 

 

नई दिल्ली: जहां आजकल लोग मोटी सैलरी वाली आईटी और कॉर्पोरेट नौकरियों की दौड़ में लगे हैं, वहीं रायपुर के जन्मे और पुणे में बसे अमित गोडसे ने एक अनोखा और साहसी रास्ता चुना। मैकेनिकल इंजीनियर और पूर्व सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अमित ने अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़कर मधुमक्खियों की दुनिया में कदम रखा और आज उनकी कंपनी ‘बी बास्केट’ सालाना 65 लाख रुपये का टर्नओवर कमा रही है।

 

 

करियर में मोड़

 

अमित गोडसे मुंबई की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में 5 साल तक काम कर चुके थे। लेकिन 2014 की गर्मी में पुणे की उनकी हाउसिंग सोसाइटी में पेस्ट कंट्रोल के कारण हजारों मधुमक्खियों की हत्या देख उन्होंने ठान लिया कि यह नाजुक प्रजाति बचानी होगी। इस दृश्य ने अमित को झकझोर दिया और उन्हें एहसास हुआ कि लोग शहद चाहते हैं, लेकिन मधुमक्खियों की अहमियत को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसी लगाव और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता के चलते उन्होंने सुरक्षित नौकरी छोड़ने का कठिन निर्णय लिया।

 

जमीनी अनुभव से मिली सफलता

 

शुरुआत में उन्होंने कई संस्थानों से प्रशिक्षण लेने की कोशिश की, लेकिन जल्दी ही समझ गए कि संस्थान केवल ‘मधुमक्खी पालन’ सिखाते हैं, ‘मधुमक्खी बचाना’ नहीं। हार न मानते हुए अमित ने आदिवासी बस्तियों में जाकर मधुमक्खियों के व्यवहार को करीब से समझा और अनुभव हासिल किया। उन्होंने सीखा कि विभिन्न प्रजातियों की मधुमक्खियों के साथ अलग-अलग तरीके अपनाने जरूरी हैं, ताकि उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित जंगलों या खेतों में शिफ्ट किया जा सके।

 

 

‘बी बास्केट’ की शुरुआत

 

2016 में पुणे में शुरू हुआ उनका स्टार्टअप अब 9 विशेषज्ञों की टीम चला रहा है, जिन्होंने पुणे और मुंबई में अब तक 17,000 से अधिक मधुमक्खी के छत्तों को बचाया है। सोशल मीडिया और लोगों की सिफारिशों के जरिए उनकी पहचान बनी। आज लोग पेस्ट कंट्रोल बुलाने के बजाय अमित की टीम से मधुमक्खियों को बचाने के लिए संपर्क करते हैं।

 

स्टार्टअप न केवल बचाव करता है, बल्कि किसानों के लिए पॉलिनेशन बॉक्स, शुद्ध शहद, मधुमक्खी का मोम और रॉयल जेली जैसी उत्पादों की आपूर्ति भी करता है। केवल 3 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ यह व्यवसाय अब 65 लाख रुपये के वार्षिक टर्नओवर और 35% मुनाफे तक पहुंच चुका है।

 

भविष्य की योजनाएँ

 

अमित गोडसे आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से मधुमक्खियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करते हैं। बड़े रॉक हनीबीज के लिए ऑर्गेनिक धुआँ और पेट्रोलियम जेली का उपयोग करते हैं, जबकि छोटी मधुमक्खियों को कार्टन बॉक्स के माध्यम से शिफ्ट किया जाता है। उनका लक्ष्य पूरे महाराष्ट्र में इस मॉडल को फैलाना है, ताकि कोई भी मधुमक्खी अनावश्यक रूप से न मारे।

 

अमित के अनुसार, मधुमक्खियों के डंक लगना उनके लिए इम्यूनिटी बढ़ाने वाला वरदान है।

 

 

संक्षेप में: अमित गोडसे ने साबित कर दिया कि अगर जुनून और प्रकृति प्रेम साथ हो, तो जोखिम भरा रास्ता भी सफलता और समाज सेवा का मार्ग बन सकता है।

 

 

Leave a Reply