Tuesday, August 11

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युवराज मेहता मामले में पुलिस दावे पर उठे सवाल मोबाइल रात 12:20 बजे बंद होने का दावा, प्रत्यक्षदर्शियों और पिता के बयान से विरोधाभास

ग्रेटर नोएडा। युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस के दावों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के बीच गंभीर विरोधाभास सामने आ रहे हैं। नोएडा पुलिस का कहना है कि युवराज का मोबाइल फोन रात 12:20 बजे बंद हो गया था, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक के पिता का दावा है कि युवराज करीब दो घंटे तक कार की छत पर बैठकर मदद के लिए चिल्लाता रहा।

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पुलिस द्वारा कार को बाहर निकाले जाने के बाद फोरेंसिक टीम की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस बेसमेंट के गहरे गड्ढे में कार गिरी थी, उसकी गहराई लगभग 60 से 70 फीट थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसे शुक्रवार को कमिश्नर कार्यालय में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद सभी रिपोर्टों को समेकित कर विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपा जाएगा।

 

रिपोर्ट में शामिल होंगे सभी तकनीकी बिंदु

 

डीसीपी ग्रेटर नोएडा ने बताया कि रिपोर्ट में घटनास्थल की पूरी जानकारी, दुर्घटना का समय, बचाव कार्य की प्रक्रिया, इंजीनियर की डूबने से मृत्यु तक की परिस्थितियां, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कार के पानी में गिरने का एंगल और तकनीकी विश्लेषण शामिल किया गया है।

 

पुलिस के अनुसार युवराज की अंतिम कॉल रात 12:20 बजे हुई थी, जिसके बाद मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि कार करीब ढाई घंटे तक पानी में पूरी तरह क्यों नहीं डूबी। इसी बिंदु पर पुलिस के दावे और प्रत्यक्षदर्शियों के कथनों के बीच अंतर सामने आ रहा है।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से बढ़ी शंका

 

मृतक के पिता और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि युवराज काफी देर तक कार की छत पर मौजूद था और जान बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहा था। यदि ऐसा है, तो मोबाइल फोन के 12:20 बजे बंद होने के पुलिस दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।

 

स्पीड ब्रेकर बना हादसे की वजह?

 

हादसे की असली वजह जानने के लिए पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से करीब 100 मीटर पहले एक स्पीड ब्रेकर मौजूद है। आशंका जताई जा रही है कि तेज रफ्तार के कारण कार स्पीड ब्रेकर पर असंतुलित हो गई, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और कार उछलकर गहरे गड्ढे में जा गिरी।

 

फिलहाल पुलिस और एसआईटी की जांच जारी है। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवराज की मौत एक हादसा थी या इसमें लापरवाही के अन्य पहलू भी शामिल हैं।

 

 

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