Tuesday, August 11

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बिहार में जमीन–फ्लैट खरीदना होगा महंगा

पटना। बिहार में जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री अब आम लोगों की जेब पर ज्यादा भारी पड़ने वाली है। राज्य सरकार ने लगभग दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद संपत्तियों की न्यूनतम मूल्य दर (सर्किल रेट) बढ़ाने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले से न सिर्फ रजिस्ट्री की लागत बढ़ेगी, बल्कि स्टाम्प शुल्क भी महंगा हो जाएगा।

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मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे मौजूदा न्यूनतम मूल्य दरों की समीक्षा कर शीघ्र अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपें। इन रिपोर्टों के आधार पर सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

बाजार भाव से पीछे रह गई थीं सरकारी दरें

जानकारी के मुताबिक, बिहार के ग्रामीण इलाकों में वर्ष 2013 के बाद और शहरी क्षेत्रों में 2016 के बाद से सर्किल रेट में कोई संशोधन नहीं किया गया था। इस दौरान जमीन और फ्लैट की बाजार कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। खासकर मुख्य सड़कों, व्यावसायिक क्षेत्रों और विकसित इलाकों में वास्तविक बाजार दर और सरकारी न्यूनतम मूल्य दर के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। इसी अंतर को खत्म करने के लिए सरकार अब सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी में है।

सरकार को मिलेगा अधिक राजस्व

न्यूनतम मूल्य दरों में बढ़ोतरी होने से सरकार को रजिस्ट्री और स्टाम्प शुल्क के जरिए अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। माना जा रहा है कि इससे राज्य के खजाने को मजबूत करने में मदद मिलेगी, हालांकि आम खरीदारों के लिए जमीन और फ्लैट लेना महंगा हो जाएगा।

इस तरह होगा जमीन का नया वर्गीकरण

ग्रामीण क्षेत्र में जमीन का वर्गीकरण—
व्यावसायिक भूमि, औद्योगिक भूमि, आवासीय भूमि, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं मुख्य सड़कों के दोनों ओर की भूमि, सिंचित और असिंचित भूमि, बलुआही, पथरीली, दियारा और चंवर भूमि के रूप में किया जाएगा।

शहरी क्षेत्र में वर्गीकरण—
प्रधान सड़क की व्यावसायिक/आवासीय भूमि, मुख्य सड़क की व्यावसायिक/आवासीय भूमि, औद्योगिक भूमि, शाखा सड़क की व्यावसायिक/आवासीय भूमि, गली-मोहल्लों की आवासीय भूमि तथा कृषि/गैर-आवासीय भूमि शामिल होंगी।

जल्द लागू हो सकती हैं नई दरें

जिला मूल्यांकन समितियों की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार नई न्यूनतम मूल्य दरों को अधिसूचित कर सकती है। ऐसे में आने वाले समय में बिहार में जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री कराना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा साबित होगा।

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