Tuesday, August 11

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बिहार में आए 167 पाकिस्तानी नागरिकों का रिकॉर्ड गायब, नीतीश सरकार कराएगी जांच

पटना। बिहार में धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से आए विदेशी नागरिकों को लेकर विधानसभा में बड़ा मुद्दा उठ खड़ा हुआ है। वर्ष 1995 से 2015 के बीच धार्मिक यात्रा पर बिहार आए कुल 173 विदेशी नागरिकों में से 167 पाकिस्तान से थे, जबकि बाकी ब्रिटेन, रूस और उज्बेकिस्तान से आए थे। हालांकि सरकार का दावा है कि सभी विदेशी नागरिक वापस अपने देश लौट गए, लेकिन पाकिस्तान से आए यात्रियों के बारे में जिला प्रशासन के पास कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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इसी कारण अब यह सवाल उठने लगा है कि कहीं ये पाकिस्तानी नागरिक बिहार में ही तो नहीं बस गए। सरकार ने इस मामले की जांच कराने की बात कही है।

विधानसभा में उठी बात, सरकार ने दिया जवाब

यह जानकारी बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में दी। उन्होंने यह जवाब भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी द्वारा पूछे गए सवाल के उत्तर में दिया।

सम्राट चौधरी ने बताया कि धार्मिक यात्रा पर आए प्रत्येक विदेशी नागरिक की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति आपराधिक गतिविधियों में शामिल न हो।

उन्होंने कहा कि इमीग्रेशन विभाग और सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम करती हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

भाजपा विधायक ने जताई चिंता

भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने सदन में चिंता जताते हुए कहा कि धार्मिक या पर्यटन यात्रा के बहाने आने वाले कुछ विदेशी नागरिक बाद में स्थानीय समाज में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि उनकी आधिकारिक पहचान और रिकॉर्ड धुंधला पड़ जाता है।

उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय स्तर पर विदेशी नागरिकों की मौजूदगी की चर्चा तो होती है, लेकिन उनके आगमन और गतिविधियों का कोई स्पष्ट सरकारी रिकॉर्ड नहीं दिखाई देता।

गोपालगंज का उदाहरण देकर उठाया सवाल

मिथिलेश तिवारी ने अपने क्षेत्र गोपालगंज का उदाहरण देते हुए कहा कि जिले में थावे मंदिर के अलावा कोई बड़ा धार्मिक केंद्र नहीं है, फिर भी समय-समय पर विदेशी नागरिकों की मौजूदगी देखी जाती रही है।

अब सरकार ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान से आए इन यात्रियों के रिकॉर्ड और गतिविधियों की गहन जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे सभी वास्तव में अपने देश लौटे या नहीं।

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