Tuesday, August 11

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नीतीश कुमार के नालंदा में 50 लाख रुपये से बने ‘सामाजिक उत्थान’ पार्क की बदहाल हालत, उद्घाटन के एक साल में जंगली घास और झाड़ियों में ढका

 

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नालंदा: बिहार के नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड अंतर्गत नानंद गांव का ‘सामाजिक उत्थान’ पार्क, जो करीब 50 लाख रुपये की लागत से मनरेगा योजना के तहत निर्मित हुआ था, एक साल के भीतर ही खंडहर जैसी हालत में पहुंच गया है। इस पार्क का उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 21 फरवरी 2025 को अपनी ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान किया था।

 

पार्क की दुर्दशा

ग्रामीणों के बैठने, टहलने और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए बनाए गए इस आधुनिक परिसर का आज कोई रखरखाव नहीं है। पेवर ब्लॉक्स के बीच उगी जंगली झाड़ियों ने मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है और पूरे परिसर में विषैले जीव-जंतुओं के पनपने का खतरा बढ़ गया है। कभी गांव की शोभा बढ़ाने वाला यह पार्क अब सरकारी धन की बर्बादी का जीता-जागता प्रमाण बन गया है।

 

देखभाल का अभाव

पार्क की देखभाल के लिए मुखिया अरुण कुमार सिन्हा ने प्रशासन से दो मालियों की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था, लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई। कर्मियों की अनुपस्थिति में करोड़ों रुपये की यह संपत्ति लगातार विनाश की ओर बढ़ती जा रही है। इसके अलावा, पार्क के समीप निर्मित तालाब का भुगतान भी लंबित है, जिससे अन्य विकास कार्य भी प्रभावित हैं।

 

सांसद के गोद लेने के बावजूद नाकामी

नानंद पंचायत को जदयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने गोद लिया हुआ है। इसके बावजूद पार्क की दुर्दशा यह दर्शाती है कि स्थानीय प्रशासन और निगरानी प्रणाली में गंभीर कमी है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में लॉन्च की गई यह योजना उद्घाटन के एक वर्ष के भीतर ही ठप और उपेक्षित हो गई।

 

निष्कर्ष

यह घटना बिहार में विकास योजनाओं में उपेक्षा और रखरखाव की कमी को उजागर करती है। ग्रामीणों की सुविधा और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, नहीं तो करोड़ों रुपये का यह निवेश व्यर्थ चला जाएगा।

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