
नई दिल्ली: दिल्ली की साकेत सिविल कोर्ट ने एमसीडी अधिकारियों की ओर से अदालत के आदेशों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाया है। सीनियर सिविल जज अनिमेष भास्कर मणि त्रिपाठी ने MCD के डिप्टी कमिश्नर (DC) को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर स्पष्टीकरण पेश करने को कहा है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि सही स्टेटस रिपोर्ट अगली तारीख तक दाखिल नहीं की गई, तो DC को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।
मामला क्या है?
यह मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा है। अदालत ने 2 दिसंबर 2025 को आदेश दिया था कि विवादित संपत्ति के संबंध में कार्यकारी अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनिष्ठ अभियंता (JE) लिखित स्पष्टीकरण दें। यह स्पष्टीकरण MCD के DC की ओर से अग्रेषित होना अनिवार्य था।
उल्लंघन का खुलासा
17 फरवरी 2026 की सुनवाई में अदालत ने पाया कि पेश की गई रिपोर्ट पर केवल AE और JE के हस्ताक्षर थे। EE ने कोई अलग स्पष्टीकरण नहीं दिया और DC की तरफ से रिपोर्ट अग्रेषित नहीं की गई। कोर्ट ने इसे अपूर्ण और अवैध मानते हुए रेकॉर्ड पर लेने से इनकार किया।
बचाव पक्ष की दलीलें खारिज
बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि अतिरिक्त निर्माण ‘कंपाउंडेबल’ है और मालिक ने इसे ठीक कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि न्यायाधीश ने इसे खारिज करते हुए कहा कि 2 दिसंबर 2025 के आदेश का पूर्ण पालन होने तक अंतरिम रोक जारी रहेगी।
अदालत का सख्त निर्देश
कोर्ट ने DC को आदेश दिया है कि वे या तो सही रिपोर्ट दाखिल करें या 18 अप्रैल 2026 को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों। इसके साथ ही संबंधित EE और AE को भी कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। संपत्ति पर लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी।
