
मुंबई: इंडिया गठबंधन के भीतर अब स्पष्ट दरारें दिखाई दे रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने विपक्षी गठबंधन से ‘जागने’ और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बातचीत शुरू करने की अपील की है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में बुधवार को छपे एडिटोरियल में कहा गया कि गठबंधन को अपनी रणनीति तय करने के लिए चुनाव घोषणा तक इंतजार नहीं करना चाहिए।
अंदर की आवाजें और गुटबाजी
‘सामना’ के लेख का शीर्षक था “अंदर की आवाजों का कन्फ्यूजन, ममता, स्टालिन या कोई और?”। इसमें बताया गया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के भीतर कई अंदर की आवाजें उभर रही हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। लेख में यह भी कहा गया कि महात्मा गांधी देश और कांग्रेस दोनों के सुप्रीम लीडर थे, जिनकी निर्णय क्षमता देशभक्ति और निस्वार्थता से प्रेरित थी। वर्तमान में भी कुछ नेताओं के बयान और गुटबाजी गठबंधन के लिए चुनौती बन रही है।
ममता बनर्जी को नेतृत्व का सुझाव
लेख में मणिशंकर अय्यर और संजय बारू के हालिया बयानों का भी उल्लेख है। अय्यर ने केरल में कांग्रेस की मुश्किल स्थिति और गुटबाजी की ओर इशारा किया। वहीं, संजय बारू ने सुझाव दिया कि ‘इंडिया’ ब्लॉक का नेतृत्व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दिया जाना चाहिए, क्योंकि वह विपक्षी ताकतों का नेतृत्व करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
आगे की राह
शिवसेना (यूबीटी) के इस रुख के बाद अब गठबंधन में रणनीति, नेतृत्व और राज्यों में चुनावी तैयारियों को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ सकती है। यह साफ है कि इंडिया गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल और निर्णय लेने की प्रक्रिया अब परीक्षा में है।
